अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सानुज भरत उमगि अनुरागा। धरि सिर सिय पद पदुम परागा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दछोटे भाई शत्रुघ्नसहित भरतजी प्रेममें उमँगकर सीताजीके चरणकमलोंकी रज सिरपर धारणकर बार-बार प्रणाम करने लगे। सीताजीने उन्हें उठाकर उनके सिरको अपने करकमलसे स्पर्शकर (सिरपर हाथ फेरकर) उन दोनोंको बैठाया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 545 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सानुज भरत उमगि अनुरागा। धरि सिर सिय पद पदुम परागा।।
पुनि पुनि करत प्रनाम उठाए। सिर कर कमल परसि बैठाए।।
स्रोत अभिलेख 2.242 · पुस्तक पृ. 545, 545
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सानुज भरत उमगि अनुरागा। धरि सिर सिय पद पदुम परागा।।
English explanation
Bharata, together with his younger brother, overflowed with affection and placed the dust of Sita’s lotus feet upon his head.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सानुज | छोटे भाई सहित | with his younger brother |
| भरत | भरत, राम के भाई | Bharata, Rama’s brother |
| उमगि | उमगकर; भर उठकर | welling up; overflowing |
| अनुरागा | प्रेम में | with affection |
| धरि | धारण करके | placing; taking upon |
| सिर | सिर पर | upon the head |
| सिय | सीता के | Sita’s |
| पद | चरण | feet |
| पदुम | कमल | lotuses |
| परागा | धूल; पराग | dust; pollen |
2 पुनि पुनि करत प्रनाम उठाए। सिर कर कमल परसि बैठाए।।
English explanation
As they bowed repeatedly, Sita raised them, touched their heads with her lotus-like hands, and seated them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर; बार-बार | again; repeatedly |
| करत | करते हुए | performing |
| प्रनाम | प्रणाम | obeisance |
| उठाए | उठाया | raised them |
| सिर | सिरों को | their heads |
| कर | हाथ | hands |
| कमल | कमल-सदृश | lotus-like |
| परसि | छूकर | having touched |
| बैठाए | बैठाया | seated them |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.242
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 545
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 545, 545
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।