अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सीयँ असीस दीन्हि मन माहीं। मगन सनेहँ देह सुधि नाहीं।।
मूल पाठ
सीयँ असीस दीन्हि मन माहीं। मगन सनेहँ देह सुधि नाहीं।।
सब बिधि सानुकूल लखि सीता। भे निसोच उर अपडर बीता।।
स्रोत अभिलेख 2.242 · पुस्तक पृ. 545, 545
भावार्थ
मूल पाठ के बादसीताजीने मन-ही-मन आशीर्वाद दिया; क्योंकि वे स्नेहमें मग्न हैं, उन्हें देहकी सुध-बुध नहीं है। सीताजीको सब प्रकारसे अपने अनुकूल देखकर भरतजी सोचरहित हो गये और उनके हृदयका कल्पित भय जाता रहा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 545 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सीयँ असीस दीन्हि मन माहीं। मगन सनेहँ देह सुधि नाहीं।।
English explanation
Sita blessed them inwardly; absorbed in affection, she had no awareness of her body.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीयँ | सीता ने | Sita |
| असीस | आशीर्वाद | a blessing |
| दीन्हि | दिया | gave |
| मन | मन | mind; heart |
| माहीं | में; भीतर | within |
| मगन | डूबी हुई | absorbed |
| सनेहँ | स्नेह में | in affection |
| देह | शरीर की | of the body |
| सुधि | सुध; चेतना | awareness |
| नाहीं | नहीं थी | had none |
2 सब बिधि सानुकूल लखि सीता। भे निसोच उर अपडर बीता।।
English explanation
Seeing Sita entirely well-disposed toward them, both brothers felt relieved; the fear in their hearts concerning themselves passed away.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सब; हर | every; all |
| बिधि | प्रकार से | in respect; in way |
| सानुकूल | अनुकूल; स्नेहपूर्ण | well-disposed; kindly |
| लखि | देखकर | seeing |
| सीता | सीता को | Sita |
| भे | हो गए | became |
| निसोच | निश्चिंत; चिंता-रहित | free from worry |
| उर | हृदय में | in the heart |
| अपडर | अपने विषय में डर या आशंका | fear or apprehension concerning oneself |
| बीता | दूर हो गया | passed away |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.242
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 545
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 545, 545
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।