अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
साधु समाज न जाकर लेखा। राम भगत महुँ जासु न रेखा।।
मूल पाठ
साधु समाज न जाकर लेखा। राम भगत महुँ जासु न रेखा।।
जायँ जिअत जग सो महि भारू। जननी जौबन बिटप कुठारू।।
स्रोत अभिलेख 2.19 · पुस्तक पृ. 500, 501
भावार्थ
मूल पाठ के बादसाधुओंके समाजमें जिसकी गिनती नहीं और श्रीरामजीके भक्तोंमें जिसका स्थान नहीं, वह जगत्में पृथ्वीका भार होकर व्यर्थ ही जीता है। वह माताके यौवनरूपी वृक्षके काटनेके लिये कुल्हाड़ामात्र है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 501 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 साधु समाज न जाकर लेखा। राम भगत महुँ जासु न रेखा।।
English explanation
One who has no standing among the virtuous and no place among Rama’s devotees—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| साधु | सज्जनों के | of the virtuous |
| समाज | समाज में | in the company |
| न | नहीं | not |
| जाकर | जिसका | whose |
| लेखा | गिनती; मान्यता | recognition; standing |
| राम | राम के | Rama’s |
| भगत | भक्तों | devotees |
| महुँ | में | among |
| जासु | जिसका | whose |
| न | नहीं | no |
| रेखा | नाम-निशान; स्थान | trace; place |
2 जायँ जिअत जग सो महि भारू। जननी जौबन बिटप कुठारू।।
English explanation
Such a person lives in vain in the world, burdens the earth, and is an axe to the tree of his mother’s youth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जायँ | व्यर्थ | in vain |
| जिअत | जीता है | lives |
| जग | संसार में | in the world |
| सो | वह | that person |
| महि | धरती का | to the earth |
| भारू | बोझ | a burden |
| जननी | माता के | his mother’s |
| जौबन | यौवनरूपी | of youth |
| बिटप | वृक्ष के लिए | to the tree |
| कुठारू | कुल्हाड़ी | an axe |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.19
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 501
- सहायक विषय
- निषादकी शङ्का और सावधानी
- मुद्रित पृष्ठ
- 500, 501
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