अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सहज सरल सुनि रघुबर बानी। साधु साधु बोले मुनि ग्यानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामजीकी सहज ही सरल वाणी सुनकर ज्ञानी मुनि वाल्मीकि बोले—धन्य! धन्य! हे रघुकुलके ध्वजास्वरूप! आप ऐसा क्यों न कहेंगे? आप सदैव वेदकी मर्यादाका पालन (रक्षण) करते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 448 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सहज सरल सुनि रघुबर बानी। साधु साधु बोले मुनि ग्यानी।।
कस न कहहु अस रघुकुलकेतू। तुम्ह पालक संतत श्रुति सेतू।।
स्रोत अभिलेख 2.126 · पुस्तक पृ. 448, 448
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सहज सरल सुनि रघुबर बानी। साधु साधु बोले मुनि ग्यानी।।
English explanation
Hearing Rama’s naturally sincere words, the wise sage said, ‘Well said! Well said!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहज | स्वाभाविक रूप से | naturally |
| सरल | सरल और निष्कपट | simple and sincere |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| रघुबर | रघुवंश में श्रेष्ठ राम की | of Rama, foremost of Raghu’s line |
| बानी | वाणी | words |
| साधु | बहुत अच्छा! | Well said! |
| साधु | बहुत अच्छा! | Well said! |
| बोले | बोले | said |
| मुनि | मुनि | the sage |
| ग्यानी | ज्ञानी | wise |
2 कस न कहहु अस रघुकुलकेतू। तुम्ह पालक संतत श्रुति सेतू।।
English explanation
O Rama, banner of Raghu’s lineage, why would you not speak thus? You ever uphold the bounds prescribed by the Vedas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कस | क्यों | why |
| न | न | not |
| कहहु | आप कहें | would you say |
| अस | ऐसा | thus |
| रघुकुलकेतू | हे रघुकुल की ध्वजा राम | O Rama, banner of Raghu’s lineage |
| तुम्ह | आप | you |
| पालक | रक्षक | upholder |
| संतत | सदा | always |
| श्रुति | वेदों की | of the Vedas |
| सेतू | मर्यादा के | of the prescribed bounds |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.126
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 448
- सहायक विषय
- श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 448, 448
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।