अयोध्याकाण्ड · छंद · छंद
श्रुति सेतु पालक राम तुम्ह जगदीस माया जानकी।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे राम! आप वेदकी मर्यादाके रक्षक जगदीश्वर हैं और जानकीजी [आपकी स्वरूपभूता] माया हैं, जो कृपाके भण्डार आपकी रुख पाकर जगत्का सृजन, पालन और संहार करती हैं। जो हजार मस्तकवाले सर्पोंके स्वामी और पृथ्वीको अपने सिरपर धारण करनेवाले हैं, वही चराचरके स्वामी शेषजी लक्ष्मण हैं। देवताओंके कार्यके लिये आप राजाका शरीर धारण करके दुष्ट राक्षसोंकी सेनाका नाश करनेके लिये चले हैं।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 449 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
श्रुति सेतु पालक राम तुम्ह जगदीस माया जानकी।
जो सृजति जगु पालति हरति रुख पाइ कृपानिधान की॥
जो सहससीसु अहीसु महिधरु लखनु सचराचर धनी।
सुर काज धरि नरराज तनु चले दलन खल निसिचर अनी॥
स्रोत अभिलेख 2.126 · पुस्तक पृ. 448, 448
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1श्रुति सेतु पालक राम तुम्ह जगदीस माया जानकी।
English explanation
AI draft meaning: Rama, you protect the order established by the Vedas and are the Lord of the world; Janaki is your Maya.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रुति | वेदों की | of the Vedas |
| सेतु | मर्यादा | established bounds of order |
| पालक | रक्षक | protector |
| राम | हे राम | O Rama |
| तुम्ह | आप | you |
| जगदीस | जगत के स्वामी | Lord of the world |
| माया | आपकी सृष्टिकारिणी माया-शक्ति | your world-producing power, Maya |
| जानकी | जानकी, सीता | Janaki, Sita |
2जो सृजति जगु पालति हरति रुख पाइ कृपानिधान की॥
English explanation
She creates, sustains, and dissolves the world in accordance with your will, O treasury of compassion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो माया | who, as Maya |
| सृजति | रचती हैं | creates |
| जगु | जगत को | the world |
| पालति | पालती हैं | sustains |
| हरति | संहार करती हैं | dissolves |
| रुख | इच्छा या संकेत | will or direction |
| पाइ | पाकर | having received |
| कृपानिधान | कृपा के भंडार की | of the treasury of compassion |
| की | की | of |
3जो सहससीसु अहीसु महिधरु लखनु सचराचर धनी।
English explanation
Lakshmana is the thousand-headed king of serpents, bearer of the earth, and lord of all that moves and remains still.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो | who |
| सहससीसु | हजार सिरों वाले | thousand-headed |
| अहीसु | सर्पों के राजा शेष | Shesha, king of serpents |
| महिधरु | पृथ्वी को धारण करने वाले | bearer of the earth |
| लखनु | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| सचराचर | समस्त चर और अचर के | of all moving and unmoving beings |
| धनी | स्वामी | lord |
4सुर काज धरि नरराज तनु चले दलन खल निसिचर अनी॥
English explanation
For the gods’ purpose, you have assumed the body of a human king and set forth to destroy the army of wicked demons.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुर | देवताओं के | of the gods |
| काज | कार्य के लिए | for the purpose |
| धरि | धारण करके | having assumed |
| नरराज | मानव राजा का | of a human king |
| तनु | शरीर | body |
| चले | आप चले हैं | you have set forth |
| दलन | संहार करने | to destroy |
| खल | दुष्ट | wicked |
| निसिचर | राक्षसों की | of demons |
| अनी | सेना | army |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 2.126
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 449
- सहायक विषय
- श्रीराम-वाल्मीकि-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 448, 448
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।