अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ससुर भानुकुल भानु भुआलू। जेहि सिहात अमरावतिपालू।।
मूल पाठ
ससुर भानुकुल भानु भुआलू। जेहि सिहात अमरावतिपालू।।
प्राननाथु रघुनाथ गोसाई। जो बड़ होत सो राम बड़ाई।।
स्रोत अभिलेख 2.199 · पुस्तक पृ. 508, 509
भावार्थ
मूल पाठ के बादसूर्यकुलके सूर्य राजा दशरथजी जिनके ससुर हैं, जिनको अमरावतीके स्वामी इन्द्र भी सिहाते थे (ईष्र्यापूर्वक उनके-जैसा ऐश्वर्य और प्रताप पाना चाहते थे); और प्रभु श्रीरघुनाथजी जिनके प्राणनाथ हैं, जो इतने बड़े हैं कि जो कोई भी बड़ा होता है, वह श्रीरामचन्द्रजीकी [दी हुई] बड़ाईसे ही होता है;॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 508 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 ससुर भानुकुल भानु भुआलू। जेहि सिहात अमरावतिपालू।।
English explanation
Her father-in-law, King Dasharatha, is the sun of the solar dynasty; even Indra, lord of Amaravati, longs for good fortune like his.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ससुर | ससुर | father-in-law |
| भानुकुल | सूर्यवंश के | of the solar dynasty |
| भानु | सूर्य, कुल के प्रकाशस्वरूप | the sun, the dynasty’s radiant glory |
| भुआलू | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| जेहि | जिनके सौभाग्य को | whose good fortune |
| सिहात | ललचाते हैं, पाने की चाह करते हैं | admires and longs to possess |
| अमरावतिपालू | अमरावती के स्वामी इंद्र | Indra, ruler of Amaravati |
2 प्राननाथु रघुनाथ गोसाई। जो बड़ होत सो राम बड़ाई।।
English explanation
Her beloved husband is Lord Rama, lord of the Raghu lineage; whoever attains greatness owes that greatness to Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्राननाथु | प्राणप्रिय पति | her dearly beloved husband |
| रघुनाथ | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of the Raghu lineage |
| गोसाई | स्वामी | lord |
| जो | जो कोई | whoever |
| बड़ | महान | great |
| होत | होता है | becomes |
| सो | वह महानता | that greatness |
| राम | राम की | Rama’s |
| बड़ाई | बड़ाई, महिमा का फल | glory, the source of that greatness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.199
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 508
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 508, 509
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।