अयोध्याकाण्ड · दोहा 199 · दोहा/सोरठा
पति देवता सुतीय मनि सीय साँथरी देखि।
पति देवता सुतीय मनि सीय साँथरी देखि।
बिहरत ह्रदउ न हहरि हर पबि तें कठिन बिसेषि।।199।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.199 · पुस्तक पृ. 508, 509
भावार्थ और शब्दार्थ
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1पति देवता सुतीय मनि सीय साँथरी देखि।
पति को देवता मानने वाली और सतियों में मणि समान सीता की बिछौनी देखकर—
English explanation
Seeing the bedding of Sita, who regards her husband as her deity and is a jewel among devoted wives—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पति | पति को | her husband as |
| देवता | देवता मानने वाली | one who regards him as her deity |
| सुतीय | सती स्त्रियों में | among devoted, virtuous wives |
| मनि | मणि, श्रेष्ठतम | a jewel, the finest |
| सीय | सीता की | of Sita |
| साँथरी | बिछौनी | bedding |
| देखि | देखकर | having seen |
2 बिहरत ह्रदउ न हहरि हर पबि तें कठिन बिसेषि।।199।।
—मेरा हृदय वेग से फट क्यों नहीं जाता? हे हर! यह वज्र से भी अधिक कठोर है।
English explanation
—why does my heart not burst violently? O Shiva! It is harder even than a thunderbolt.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिहरत | फटता, विदीर्ण होता | splits, bursts |
| ह्रदउ | हृदय | heart |
| न | नहीं | not |
| हहरि | वेग से, जोर से | violently, with force |
| हर | हे हर, हे शिव | O Hara, O Shiva |
| पबि | वज्र | a thunderbolt |
| तें | से | than |
| कठिन | कठोर | hard |
| बिसेषि | अधिक, विशेष रूप से | even more, exceedingly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 199
- स्रोत अभिलेख
- 2.199
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 508, 509
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