अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सरल सुभाय मायँ हियँ लाए। अति हित मनहुँ राम फिरि आए।।
मूल पाठ
सरल सुभाय मायँ हियँ लाए। अति हित मनहुँ राम फिरि आए।।
भेंटेउ बहुरि लखन लघु भाई। सोकु सनेहु न हृदयँ समाई।।
स्रोत अभिलेख 2.165 · पुस्तक पृ. 480, 481
भावार्थ
मूल पाठ के बादसरल स्वभाववाली माताने बड़े प्रेमसे भरतजीको छातीसे लगा लिया; मानो श्रीरामजी ही लौटकर आ गये हों। फिर लक्ष्मणजीके छोटे भाई शत्रुघ्नको हृदयसे लगाया। शोक और स्नेह हृदयमें समाता नहीं है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 480 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सरल सुभाय मायँ हियँ लाए। अति हित मनहुँ राम फिरि आए।।
English explanation
The gentle-natured mother clasped him to her heart with such deep affection that it seemed Rama himself had returned.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सरल | सरल, निष्कपट | gentle and guileless |
| सुभाय | स्वभाव वाली | by nature |
| मायँ | माता ने; यहाँ कौसल्या ने | the mother, here Kausalya |
| हियँ | हृदय से | to her heart |
| लाए | लगा लिया | clasped |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| हित | प्रेम से | with affection |
| मनहुँ | मानो | as though |
| राम | राम | Rama, Kausalya’s son |
| फिरि | लौटकर | back |
| आए | आ गए हों | had come |
2 भेंटेउ बहुरि लखन लघु भाई। सोकु सनेहु न हृदयँ समाई।।
English explanation
Then came the meeting with Lakshmana’s younger brother, Shatrughna; grief and affection overflowed the heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भेंटेउ | भेंट हुई; गले मिले | met in an embrace |
| बहुरि | फिर | then; again |
| लखन | लक्ष्मण के | of Lakshmana |
| लघु | छोटे | younger |
| भाई | भाई, शत्रुघ्न | brother, Shatrughna |
| सोकु | शोक | grief |
| सनेहु | स्नेह | affection |
| न | नहीं | not |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| समाई | समाते थे | could be contained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.165
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 480
- सहायक विषय
- भरत-कौसल्या-संवाद और दशरथजीकी अन्त्येष्टि क्रिया
- मुद्रित पृष्ठ
- 480, 481
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।