अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सरनि सरोज बिटप बन फूले। गुंजत मंजु मधुप रस भूले।।
मूल पाठ
सरनि सरोज बिटप बन फूले। गुंजत मंजु मधुप रस भूले।।
खग मृग बिपुल कोलाहल करहीं। बिरहित बैर मुदित मन चरहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.124 · पुस्तक पृ. 446, 447
भावार्थ
मूल पाठ के बादसरोवरोंमें कमल और वनोंमें वृक्ष फूल रहे हैं और मकरन्द-रसमें मस्त हुए भौंरे सुन्दर गुंजार कर रहे हैं। बहुत-से पक्षी और पशु कोलाहल कर रहे हैं और वैरसे रहित होकर प्रसन्न मनसे विचर रहे हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 447 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सरनि सरोज बिटप बन फूले। गुंजत मंजु मधुप रस भूले।।
English explanation
Lotuses bloomed in the lakes and trees flowered in the woods; bees hummed sweetly, absorbed in nectar.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सरनि | सरोवरों में | in the lakes |
| सरोज | कमल | lotuses |
| बिटप | पेड़ | trees |
| बन | वन में | in the woods |
| फूले | खिले हुए थे | were in bloom |
| गुंजत | गुंजार करते थे | were humming |
| मंजु | मधुर ढंग से | sweetly |
| मधुप | भौंरे | bees |
| रस | पुष्परस में | in nectar |
| भूले | मग्न; सुध-बुध भूले | absorbed; oblivious |
2 खग मृग बिपुल कोलाहल करहीं। बिरहित बैर मुदित मन चरहीं।।
English explanation
Birds and wild animals made abundant calls and sounds; free of hostility, they moved about and fed with joyful hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खग | पक्षी | birds |
| मृग | हिरन तथा वन्य पशु | deer and wild animals |
| बिपुल | बहुत | abundant |
| कोलाहल | मिला-जुला शोर | clamor; mingled calls |
| करहीं | करते हैं | make |
| बिरहित | रहित | free of |
| बैर | वैर से | hostility |
| मुदित | प्रसन्न | joyful |
| मन | मन से | at heart |
| चरहीं | विचरते और चरते हैं | roam and feed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.124
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 447
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 446, 447
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।