अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
समरथ सरनागत हितकारी। गुनगाहकु अवगुन अघ हारी।।
मूल पाठ
समरथ सरनागत हितकारी। गुनगाहकु अवगुन अघ हारी।।
स्वामि गोसाँइहि सरिस गोसाई। मोहि समान मैं साइँ दोहाई।।
स्रोत अभिलेख 2.298 · पुस्तक पृ. 592, 593
भावार्थ
मूल पाठ के बादसमर्थ, शरणागतका हित करनेवाले, गुणोंका आदर करनेवाले और अवगुणों तथा पापोंको हरनेवाले हैं। हे गोसाईं! आप-सरीखे स्वामी आप ही हैं और स्वामीके साथ द्रोह करनेमें मेरे समान मैं ही हूँ॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 593 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 समरथ सरनागत हितकारी। गुनगाहकु अवगुन अघ हारी।।
English explanation
You are powerful, a benefactor of those seeking refuge, appreciative of virtues, and a remover of faults and sins.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समरथ | समर्थ, सक्षम | powerful, capable |
| सरनागत | शरण में आए लोगों के | of those who seek refuge |
| हितकारी | हित करने वाले | benefactor |
| गुनगाहकु | गुणों को ग्रहण और सराहने वाले | one who recognizes and appreciates virtues |
| अवगुन | दोष, दुर्गुण | faults, shortcomings |
| अघ | पाप | sins |
| हारी | हरने वाले, दूर करने वाले | remover |
2 स्वामि गोसाँइहि सरिस गोसाई। मोहि समान मैं साइँ दोहाई।।
English explanation
O master, you alone are a master like yourself, and I alone am one like me—I invoke your name as my solemn appeal.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्वामि | हे स्वामी | O master |
| गोसाँइहि | आप स्वामी के | you, the master |
| सरिस | समान | equal to, like |
| गोसाई | स्वामी; यहाँ आप ही | master; here, you yourself |
| मोहि | मेरे | me |
| समान | समान | like, equal to |
| मैं | मैं ही; वक्ता भरत | I myself; the speaker Bharata |
| साइँ | हे स्वामी | O lord |
| दोहाई | आपकी दुहाई, आपके नाम की शपथ | solemn appeal invoking your name |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.298
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 593
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 592, 593
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।