अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सब सिय राम प्रीति कि सि मूरती। जनु करुना बहु बेष बिसूरति।।
मूल पाठ
सब सिय राम प्रीति कि सि मूरती। जनु करुना बहु बेष बिसूरति।।
सीय मातु कह बिधि बुधि बाँकी। जो पय फेनु फोर पबि टाँकी।।
स्रोत अभिलेख 2.281 · पुस्तक पृ. 578, 579
भावार्थ
मूल पाठ के बादसभी श्रीसीतारामजीके प्रेमकी मूर्ति-सी हैं, मानो स्वयं करुणा ही बहुत-से वेष (रूप) धारण करके विसूर रही हो (दु:ख कर रही हो)। सीताजीकी माता सुनयनाजीने कहा—विधाताकी बुद्धि बड़ी टेढ़ी है, जो दूधके फेन-जैसी कोमल वस्तुको वज्रकी टाँकीसे फोड़ रहा है (अर्थात् जो अत्यन्त कोमल और निर्दोष हैं उनपर विपत्ति-पर-विपत्ति ढहा रहा है)॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 578 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सब सिय राम प्रीति कि सि मूरती। जनु करुना बहु बेष बिसूरति।।
English explanation
All seemed embodiments of love for Sita and Rama, as though compassion itself were lamenting in many forms.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सभी | all |
| सिय | सीता के प्रति | for Sita |
| राम | राम के प्रति | for Rama |
| प्रीति | प्रेम | love |
| कि | की | of |
| सि | सी; मानो | like; as if |
| मूरती | मूर्तियाँ | embodiments |
| जनु | मानो | as though |
| करुना | करुणा | compassion |
| बहु | अनेक | many |
| बेष | रूपों में | in forms |
| बिसूरति | विलाप कर रही हो | were lamenting |
2 सीय मातु कह बिधि बुधि बाँकी। जो पय फेनु फोर पबि टाँकी।।
English explanation
Sita’s mother said, “The Creator’s understanding is perverse: he breaks milk foam with a thunderbolt-hard chisel.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीय | सीता की | Sita’s |
| मातु | माता | mother |
| कह | कहती हैं | says |
| बिधि | विधाता की | the Creator’s |
| बुधि | बुद्धि | understanding |
| बाँकी | टेढ़ी | perverse |
| जो | जो | who |
| पय | दूध का | of milk |
| फेनु | झाग | foam |
| फोर | फोड़ता है | breaks |
| पबि | वज्र की | of thunderbolt hardness |
| टाँकी | छेनी से | with a chisel |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.281
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 578
- सहायक विषय
- कौसल्या-सुनयना-संवाद, श्रीसीताजीका शील
- मुद्रित पृष्ठ
- 578, 579
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।