अयोध्याकाण्ड · दोहा 281 · दोहा/सोरठा
सुनिअ सुधा देखिअहिं गरल सब करतूति कराल।
सुनिअ सुधा देखिअहिं गरल सब करतूति कराल।
जहँ तहँ काक उलूक बक मानस सकृत मराल।।281।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.281 · पुस्तक पृ. 578, 579
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सुनिअ सुधा देखिअहिं गरल सब करतूति कराल।
‘अमृत तो केवल सुनने में आता है, पर विष दिखाई पड़ता है; विधाता के सभी काम भयानक हैं।’
English explanation
“Nectar is only heard of, while poison is seen; all the Creator’s deeds are dreadful.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनिअ | सुनने में आता है | is heard of |
| सुधा | अमृत | nectar of immortality |
| देखिअहिं | दिखाई पड़ता है | is seen |
| गरल | विष | poison |
| सब | सभी | all |
| करतूति | कर्म | deeds |
| कराल | भयानक | dreadful |
2 जहँ तहँ काक उलूक बक मानस सकृत मराल।।281।।
‘जहाँ-तहाँ कौए, उल्लू और बगुले हैं, पर हंस मानसरोवर में ही कभी-कभार मिलता है।’
English explanation
“Crows, owls, and herons are everywhere, but a swan is found only rarely, at Lake Manasa.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ | where |
| तहँ | तहाँ; हर जगह | there; everywhere |
| काक | कौए | crows |
| उलूक | उल्लू | owls |
| बक | बगुले | herons |
| मानस | मानसरोवर में | at Lake Manasa |
| सकृत | कभी-कभार | only rarely |
| मराल | हंस | a swan |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 281
- स्रोत अभिलेख
- 2.281
- सहायक विषय
- कौसल्या-सुनयना-संवाद, श्रीसीताजीका शील
- मुद्रित पृष्ठ
- 578, 579
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