अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सीलु सनेह सकल दुहु ओरा। द्रवहिं देखि सुनि कुलिस कठोरा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्ददोनों ओर सबके शील और प्रेमको देखकर और सुनकर कठोर वज्र भी पिघल जाते हैं। शरीर पुलकित और शिथिल हैं और नेत्रोंमें [शोक और प्रेमके] आँसू हैं। सब अपने [पैरोंके] नखोंसे जमीन कुरेदने और सोचने लगीं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 578 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सीलु सनेह सकल दुहु ओरा। द्रवहिं देखि सुनि कुलिस कठोरा।।
पुलक सिथिल तन बारि बिलोचन। महि नख लिखन लगीं सब सोचन।।
स्रोत अभिलेख 2.281 · पुस्तक पृ. 578, 579
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सीलु सनेह सकल दुहु ओरा। द्रवहिं देखि सुनि कुलिस कठोरा।।
English explanation
The graciousness and affection of everyone on both sides were such that even hard thunderbolts would melt on seeing and hearing them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीलु | शील और सौम्यता | gracious conduct |
| सनेह | स्नेह | affection |
| सकल | सबका | of everyone |
| दुहु | दोनों | both |
| ओरा | ओर | sides |
| द्रवहिं | पिघल जाते हैं | melt |
| देखि | देखकर | on seeing |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| कुलिस | वज्र भी | even thunderbolts |
| कठोरा | कठोर | hard |
2 पुलक सिथिल तन बारि बिलोचन। महि नख लिखन लगीं सब सोचन।।
English explanation
Their bodies thrilled and grew limp, and their eyes filled with tears; absorbed in sorrow, they all began tracing the ground with their nails.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुलक | रोमांचित | thrilling with emotion |
| सिथिल | शिथिल | limp |
| तन | शरीर | bodies |
| बारि | आँसू | tears |
| बिलोचन | आँखों में | in the eyes |
| महि | धरती पर | on the ground |
| नख | नाखूनों से | with their nails |
| लिखन | रेखाएँ खींचने | to trace marks |
| लगीं | लगीं | began |
| सब | सभी | all |
| सोचन | शोक-चिंता में | in sorrowful thought |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.281
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 578
- सहायक विषय
- कौसल्या-सुनयना-संवाद, श्रीसीताजीका शील
- मुद्रित पृष्ठ
- 578, 579
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।