अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सावकास सुनि सब सिय सासू। आयउ जनकराज रनिवासू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउनसे यह सुनकर कि सीताकी सब सासुएँ इस समय फुरसतमें हैं, जनकराजका रनिवास उनसे मिलने आया। कौसल्याजीने आदरपूर्वक उनका सम्मान किया और समयोचित आसन लाकर दिये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 578 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सावकास सुनि सब सिय सासू। आयउ जनकराज रनिवासू।।
कौसल्याँ सादर सनमानी। आसन दिए समय सम आनी।।
स्रोत अभिलेख 2.281 · पुस्तक पृ. 578, 579
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सावकास सुनि सब सिय सासू। आयउ जनकराज रनिवासू।।
English explanation
On hearing that all of Sita’s mothers-in-law were free, King Janaka’s royal ladies came there.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सावकास | अवकाश में | free from engagements |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| सब | सभी | all |
| सिय | सीता की | Sita’s |
| सासू | सासें | mothers-in-law |
| आयउ | आया | came |
| जनकराज | राजा जनक का | of King Janaka, Sita’s father |
| रनिवासू | रानी-समाज | the royal ladies |
2 कौसल्याँ सादर सनमानी। आसन दिए समय सम आनी।।
English explanation
Kausalya respectfully welcomed them and had suitable seats brought and offered for the occasion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कौसल्याँ | कौसल्या ने | Kausalya, Rama’s mother |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| सनमानी | सम्मान किया | honored and welcomed |
| आसन | बैठने के आसन | seats |
| दिए | दिए | offered |
| समय | अवसर के | to the occasion |
| सम | अनुकूल | suited |
| आनी | लाकर | having brought |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.281
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 578
- सहायक विषय
- कौसल्या-सुनयना-संवाद, श्रीसीताजीका शील
- मुद्रित पृष्ठ
- 578, 579
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।