अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सखा बचन सुनि बिटप निहारी। उमगे भरत बिलोचन बारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसखाके वचन सुनकर और वृक्षोंको देखकर भरतजीके नेत्रोंमें जल उमड़ आया। दोनों भाई प्रणाम करते हुए चले। उनके प्रेमका वर्णन करनेमें सरस्वतीजी भी सकुचाती हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 541 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सखा बचन सुनि बिटप निहारी। उमगे भरत बिलोचन बारी।।
करत प्रनाम चले दोउ भाई। कहत प्रीति सारद सकुचाई।।
स्रोत अभिलेख 2.238 · पुस्तक पृ. 541, 542
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सखा बचन सुनि बिटप निहारी। उमगे भरत बिलोचन बारी।।
English explanation
Hearing his friend's words and looking at the tree, Bharata's eyes welled up with tears.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सखा | मित्र, निषादराज | his friend, the Nishada chief |
| बचन | वचन | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| बिटप | वृक्ष | the tree |
| निहारी | देखकर | having looked at |
| उमगे | उमड़ आए | welled up |
| भरत | राम के भाई भरत के | of Bharata, Rama's brother |
| बिलोचन | नेत्रों में | in the eyes |
| बारी | जल, आँसू | water, tears |
2 करत प्रनाम चले दोउ भाई। कहत प्रीति सारद सकुचाई।।
English explanation
The two brothers proceeded, offering reverence; even Sarasvati faltered in describing their love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करत | करते हुए | while offering |
| प्रनाम | प्रणाम | reverent salutations |
| चले | आगे चले | proceeded |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई, भरत और शत्रुघ्न | brothers, Bharata and Shatrughna |
| कहत | वर्णन करते हुए | while describing |
| प्रीति | प्रेम | their love |
| सारद | वाणी की देवी सरस्वती | Sarasvati, goddess of speech |
| सकुचाई | संकोच में पड़ीं | felt hesitant |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.238
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 541
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 541, 542
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।