अयोध्याकाण्ड · दोहा 237 · दोहा/सोरठा
जहाँ बैठि मुनिगन सहित नित सिय रामु सुजान।
जहाँ बैठि मुनिगन सहित नित सिय रामु सुजान।
सुनहिं कथा इतिहास सब आगम निगम पुरान।।237।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.237 · पुस्तक पृ. 541, 541
भावार्थ और शब्दार्थ
1जहाँ बैठि मुनिगन सहित नित सिय रामु सुजान।
जहाँ सुजान सीता और राम प्रतिदिन मुनियों के साथ बैठते हैं और अगली पंक्ति में कही कथाएँ सुनते हैं।
English explanation
There, wise Sita and Rama sit daily with the sages and listen to the accounts described in the following line.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहाँ | जहाँ | where |
| बैठि | बैठकर | sitting |
| मुनिगन | मुनियों के समूह | the assembled sages |
| सहित | के साथ | with |
| नित | प्रतिदिन | daily |
| सिय | सीता | Sita |
| रामु | राम | Rama |
| सुजान | सुज्ञानी | wise |
2 सुनहिं कथा इतिहास सब आगम निगम पुरान।।237।।
वे सभी आगमों, वेदों और पुराणों की कथाएँ तथा प्राचीन वृत्तांत सुनते हैं।
English explanation
They listen to stories and ancient accounts from all the Agamas, Vedas, and Puranas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनहिं | सुनते हैं | listen |
| कथा | कथाएँ | stories |
| इतिहास | प्राचीन वृत्तांत | ancient accounts |
| सब | सभी | all |
| आगम | आगम शास्त्र | Agama scriptures |
| निगम | वेद | the Vedas |
| पुरान | पुराण | the Puranas |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 237
- स्रोत अभिलेख
- 2.237
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 541, 541
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।