अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हरषहिं निरखि राम पद अंका। मानहुँ पारसु पायउ रंका।।
मूल पाठ
हरषहिं निरखि राम पद अंका। मानहुँ पारसु पायउ रंका।।
रज सिर धरि हियँ नयनन्हि लावहिं। रघुबर मिलन सरिस सुख पावहिं।।
स्रोत अभिलेख 2.238 · पुस्तक पृ. 541, 542
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामचन्द्रजीके चरणचिह्न देखकर दोनों भाई ऐसे हर्षित होते हैं मानो दरिद्र पारस पा गया हो। वहाँकी रजको मस्तकपर रखकर हृदयमें और नेत्रोंमें लगाते हैं और श्रीरघुनाथजीके मिलनेके समान सुख पाते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 541 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 हरषहिं निरखि राम पद अंका। मानहुँ पारसु पायउ रंका।।
English explanation
Seeing Rama's footprints, they rejoice as though a pauper had found the philosopher's stone.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरषहिं | वे हर्षित होते हैं | they rejoice |
| निरखि | देखकर | on seeing |
| राम | राम के | Rama's |
| पद | चरणों के | of the feet |
| अंका | चिह्न | marks |
| मानहुँ | मानो | as though |
| पारसु | पारस पत्थर | the philosopher's stone |
| पायउ | पा लिया | had found |
| रंका | निर्धन व्यक्ति ने | a pauper |
2 रज सिर धरि हियँ नयनन्हि लावहिं। रघुबर मिलन सरिस सुख पावहिं।।
English explanation
They place that dust on their heads and touch it to their hearts and eyes, finding joy like that of meeting Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रज | चरणचिह्नों की धूल | dust from the footprints |
| सिर | सिर पर | on their heads |
| धरि | रखकर | having placed |
| हियँ | हृदय से | to their hearts |
| नयनन्हि | आँखों से | to their eyes |
| लावहिं | वे लगाते हैं | they touch it |
| रघुबर | रघुकुलश्रेष्ठ राम से | with Rama, foremost of Raghu's lineage |
| मिलन | मिलने के | of meeting |
| सरिस | समान | like |
| सुख | आनंद | joy |
| पावहिं | वे पाते हैं | they obtain |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.238
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 541
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 541, 542
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।