अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखि भरत गति अकथ अतीवा। प्रेम मगन मृग खग जड़ जीवा।।
मूल पाठ
देखि भरत गति अकथ अतीवा। प्रेम मगन मृग खग जड़ जीवा।।
सखहि सनेह बिबस मग भूला। कहि सुपंथ सुर बरषहिं फूला।।
स्रोत अभिलेख 2.238 · पुस्तक पृ. 541, 542
भावार्थ
मूल पाठ के बादभरतजीकी अत्यन्त अनिर्वचनीय दशा देखकर वनके पशु, पक्षी और जड़ (वृक्षादि) जीव प्रेममें मग्र हो गये। प्रेमके विशेष वश होनेसे सखा निषादराजको भी रास्ता भूल गया। तब देवता सुन्दर रास्ता बतलाकर फूल बरसाने लगे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 542 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 देखि भरत गति अकथ अतीवा। प्रेम मगन मृग खग जड़ जीवा।।
English explanation
Seeing Bharata's utterly indescribable state, animals, birds, and even creatures of dull understanding became absorbed in love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | on seeing |
| भरत | भरत की | Bharata's |
| गति | दशा | state |
| अकथ | वर्णन से परे | indescribable |
| अतीवा | अत्यंत | utterly |
| प्रेम | प्रेम में | in love |
| मगन | मग्न | absorbed |
| मृग | पशु | animals |
| खग | पक्षी | birds |
| जड़ | जड़-बुद्धि वाले | of dull understanding |
| जीवा | जीव | creatures |
2 सखहि सनेह बिबस मग भूला। कहि सुपंथ सुर बरषहिं फूला।।
English explanation
The friend too, overwhelmed by affection, forgot the way; the gods point out the right path and shower flowers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सखहि | सखा भी, निषादराज | the friend too, the Nishada chief |
| सनेह | स्नेह से | by affection |
| बिबस | विवश | overwhelmed |
| मग | मार्ग | the way |
| भूला | भूल गया | forgot |
| कहि | बताकर | having indicated |
| सुपंथ | सही मार्ग | the right path |
| सुर | देवता | the gods |
| बरषहिं | बरसाते हैं | shower |
| फूला | फूल | flowers |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.238
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 542
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 541, 542
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।