अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सखा बचन सुनि उर धरि धीरा। बास चले सुमिरत रघुबीरा।।
मूल पाठ
सखा बचन सुनि उर धरि धीरा। बास चले सुमिरत रघुबीरा।।
यह सुधि पाइ नगर नर नारी। चले बिलोकन आरत भारी।।
स्रोत अभिलेख 2.202 · पुस्तक पृ. 511, 512
भावार्थ
मूल पाठ के बादसखाके वचन सुनकर, हृदयमें धीरज धरकर श्रीरामचन्द्रजीका स्मरण करते हुए भरतजी डेरेको चले। नगरके सारे स्त्री-पुरुष यह (श्रीरामजीके ठहरनेके स्थानका) समाचार पाकर बड़े आतुर होकर उस स्थानको देखने चले॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 511 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सखा बचन सुनि उर धरि धीरा। बास चले सुमिरत रघुबीरा।।
English explanation
AI draft: Hearing his friend Nishada’s words, Bharata steadied his heart and went to his lodging, remembering Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सखा | मित्र निषाद के | of his friend Nishada |
| बचन | वचन | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| उर | हृदय में | in his heart |
| धरि | रखकर | having maintained |
| धीरा | धीरज | composure |
| बास | ठहरने के स्थान को | to his lodging |
| चले | चले गए | went |
| सुमिरत | स्मरण करते हुए | remembering |
| रघुबीरा | रघुवंश के वीर श्रीराम को | Rama, the hero of Raghu’s lineage |
2 यह सुधि पाइ नगर नर नारी। चले बिलोकन आरत भारी।।
English explanation
On receiving this news, the town’s men and women, deeply distressed, went to see.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह | this |
| सुधि | समाचार | news |
| पाइ | पाकर | having received |
| नगर | नगर के | of the town |
| नर | पुरुष | men |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
| चले | चले | went |
| बिलोकन | देखने के लिए | to see |
| आरत | व्याकुल | distressed |
| भारी | अत्यंत | deeply |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.202
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 511
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 511, 512
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।