अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
परदखिना करि करहिं प्रनामा। देहिं कैकइहि खोरि निकामा।।
मूल पाठ
परदखिना करि करहिं प्रनामा। देहिं कैकइहि खोरि निकामा।।
भरी भरि बारि बिलोचन लेंहीं। बाम बिधाताहि दूषन देहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.202 · पुस्तक पृ. 511, 512
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे उस स्थानकी परिक्रमा करके प्रणाम करते हैं और कैकेयीको बहुत दोष देते हैं। नेत्रोंमें जल भर-भर लेते हैं और प्रतिकूल विधाताको दूषण देते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 511 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 परदखिना करि करहिं प्रनामा। देहिं कैकइहि खोरि निकामा।।
English explanation
They circumambulate and bow in reverence, and heap blame upon Kaikeyi.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परदखिना | परिक्रमा | circumambulation |
| करि | करके | having performed |
| करहिं | करते हैं | perform |
| प्रनामा | प्रणाम | reverent salutations |
| देहिं | देते हैं | give |
| कैकइहि | कैकेयी को | to Kaikeyi, Bharata’s mother |
| खोरि | दोष | blame |
| निकामा | बहुत अधिक | in great measure |
2 भरी भरि बारि बिलोचन लेंहीं। बाम बिधाताहि दूषन देहीं।।
English explanation
Their eyes repeatedly fill with tears, and they blame the adverse disposer of fate.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरी | भर-भरकर | filling repeatedly |
| भरि | भरकर | filling |
| बारि | जल अर्थात आँसू | water, here tears |
| बिलोचन | आँखों में | in their eyes |
| लेंहीं | लेते हैं | take in |
| बाम | प्रतिकूल | adverse |
| बिधाताहि | विधाता को | to the disposer of fate |
| दूषन | दोष | blame |
| देहीं | देते हैं | give |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.202
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 511
- सहायक विषय
- भरत-निषाद-मिलन और संवाद एवं भरतजीका तथा नगरवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 511, 512
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।