अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सकल सुरासुर जुरहिं जुझारा। रामहि समर न जीतनिहारा।।
मूल पाठ
सकल सुरासुर जुरहिं जुझारा। रामहि समर न जीतनिहारा।।
का आचरजु भरतु अस करहीं। नहिं बिष बेलि अमिअ फल फरहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.189 · पुस्तक पृ. 499, 500
भावार्थ
मूल पाठ के बादसम्पूर्ण देवता और दैत्य वीर जुट जायँ, तो भी श्रीरामजीको रणमें जीतनेवाला कोई नहीं है। भरत जो ऐसा कर रहे हैं, इसमें आश्चर्य ही क्या है? विषकी बेलें अमृतफल कभी नहीं फलतीं!॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 500 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सकल सुरासुर जुरहिं जुझारा। रामहि समर न जीतनिहारा।।
English explanation
Even if all the warrior gods and demons unite, none can defeat Rama in battle.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकल | सभी | all |
| सुरासुर | देवता और असुर | gods and demons |
| जुरहिं | एकत्र हो जाएँ | join together |
| जुझारा | योद्धा | warriors |
| रामहि | राम को | Rama |
| समर | युद्ध में | in battle |
| न | नहीं | not |
| जीतनिहारा | जीत सकने वाला | one capable of defeating |
2 का आचरजु भरतु अस करहीं। नहिं बिष बेलि अमिअ फल फरहीं।।
English explanation
Guha thinks: What wonder is there if Bharata acts thus? A poisonous vine does not bear nectar-like fruit.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| का | क्या | what |
| आचरजु | आश्चर्य | wonder |
| भरतु | भरत | Bharata, Rama’s brother |
| अस | ऐसा | thus |
| करहीं | करें | should act |
| नहिं | नहीं | not |
| बिष | विष की | poisonous |
| बेलि | बेल | vine |
| अमिअ | अमृत के | nectar-like |
| फल | फल | fruit |
| फरहीं | फलते या लगते हैं | grow or are borne |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.189
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 500
- सहायक विषय
- निषादकी शङ्का और सावधानी
- मुद्रित पृष्ठ
- 499, 500
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।