अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जानहिं सानुज रामहि मारी। करउँ अकंटक राजु सुखारी।।
मूल पाठ
जानहिं सानुज रामहि मारी। करउँ अकंटक राजु सुखारी।।
भरत न राजनीति उर आनी। तब कलंकु अब जीवन हानी।।
स्रोत अभिलेख 2.189 · पुस्तक पृ. 499, 500
भावार्थ
मूल पाठ के बादसमझते हैं कि छोटे भाई लक्ष्मणसहित श्रीरामको मारकर सुखसे निष्कण्टक राज्य करूँगा। भरतने हृदयमें राजनीतिको स्थान नहीं दिया (राजनीतिका विचार नहीं किया)। तब (पहले) तो कलंक ही लगा था, अब तो जीवनसे ही हाथ धोना पड़ेगा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 500 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जानहिं सानुज रामहि मारी। करउँ अकंटक राजु सुखारी।।
English explanation
Guha suspects that Bharata thinks: By killing Rama along with his younger brother, I shall rule happily without opposition.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानहिं | वे सोचते हैं | he thinks |
| सानुज | छोटे भाई लक्ष्मण सहित | together with his younger brother Lakshmana |
| रामहि | राम को | Rama |
| मारी | मारकर | having killed |
| करउँ | मैं करूँ | I shall exercise |
| अकंटक | बाधा या विरोध से रहित | free of obstacles or opposition |
| राजु | राज्य-शासन | sovereign rule |
| सुखारी | सुखपूर्वक | happily |
2 भरत न राजनीति उर आनी। तब कलंकु अब जीवन हानी।।
English explanation
Guha thinks: Bharata has not taken the principles of kingship to heart; then there was disgrace, and now there will be loss of life.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत ने | Bharata |
| न | नहीं | not |
| राजनीति | राजधर्म और शासन की नीति | the principles of kingship and statecraft |
| उर | हृदय में | in his heart |
| आनी | लायी या ध्यान में रखी | brought or kept in mind |
| तब | तब; पहले | then; previously |
| कलंकु | कलंक | disgrace |
| अब | अब | now |
| जीवन | प्राणों की | of life |
| हानी | हानि | loss |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.189
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 500
- सहायक विषय
- निषादकी शङ्का और सावधानी
- मुद्रित पृष्ठ
- 499, 500
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।