अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
संभावित कहुँ अपजस लाहू। मरन कोटि सम दारुन दाहू।।
मूल पाठ
संभावित कहुँ अपजस लाहू। मरन कोटि सम दारुन दाहू।।
तुम्ह सन तात बहुत का कहऊँ। दिएँ उतरु फिरि पातकु लहऊँ।।
स्रोत अभिलेख 2.95 · पुस्तक पृ. 422, 422
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रतिष्ठित पुरुषके लिये अपयशकी प्राप्ति करोड़ों मृत्युके समान भीषण सन्ताप देनेवाली है। हे तात! मैं आपसे अधिक क्या कहूँ! लौटकर उत्तर देनेमें भी पापका भागी होता हूँ॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 422 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 संभावित कहुँ अपजस लाहू। मरन कोटि सम दारुन दाहू।।
English explanation
For an honored person, incurring dishonor is a terrible torment, like dying millions of deaths.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संभावित | सम्मानित व्यक्ति | an honored person |
| कहुँ | के लिए | for |
| अपजस | बदनामी | dishonor |
| लाहू | प्राप्त होना | incurring |
| मरन | मृत्यु | deaths |
| कोटि | करोड़ों | millions of |
| सम | के समान | like |
| दारुन | भयंकर | terrible |
| दाहू | जलन; संताप | burning anguish |
2 तुम्ह सन तात बहुत का कहऊँ। दिएँ उतरु फिरि पातकु लहऊँ।।
English explanation
Dear sir, what more should I say to you? By answering back, I would incur sin.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | आप | you |
| सन | से | to |
| तात | हे तात; आदरणीय संबोधन | dear sir; respectful address |
| बहुत | अधिक | more |
| का | क्या | what |
| कहऊँ | मैं कहूँ | should I say |
| दिएँ | देने पर | by giving |
| उतरु | उत्तर | an answer |
| फिरि | पलटकर | back |
| पातकु | पाप | sin |
| लहऊँ | मैं प्राप्त करूँगा | I would incur |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.95
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 422
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 422, 422
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।