अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
धरमु न दूसर सत्य समाना। आगम निगम पुरान बखाना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवेद, शास्त्र और पुराणोंमें कहा गया है कि सत्यके समान दूसरा धर्म नहीं है। मैंने उस धर्मको सहज ही पा लिया है। इस [सत्यरूपी धर्म] का त्याग करनेसे तीनों लोकोंमें अपयश छा जायगा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 422 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
धरमु न दूसर सत्य समाना। आगम निगम पुरान बखाना।।
मैं सोइ धरमु सुलभ करि पावा। तजें तिहूँ पुर अपजसु छावा।।
स्रोत अभिलेख 2.95 · पुस्तक पृ. 422, 422
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 धरमु न दूसर सत्य समाना। आगम निगम पुरान बखाना।।
English explanation
There is no other virtue equal to truth; the Agamas, Vedas, and Puranas have declared this.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धरमु | धर्म; सदाचरण | virtue; righteous conduct |
| न | नहीं | not |
| दूसर | अन्य कोई | any other |
| सत्य | सत्य के | to truth |
| समाना | बराबर | equal |
| आगम | आगम शास्त्र | the Agama scriptures |
| निगम | वेद | the Vedas |
| पुरान | पुराण | the Puranas |
| बखाना | कहा है | have declared |
2 मैं सोइ धरमु सुलभ करि पावा। तजें तिहूँ पुर अपजसु छावा।।
English explanation
That very duty has come readily to me; abandoning it would spread dishonor throughout the three worlds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मैं | मैंने; मुझे | I; to me |
| सोइ | वही | that very |
| धरमु | धर्म; सत्यपालन का कर्तव्य | duty of keeping truth |
| सुलभ | सहज रूप से उपलब्ध | readily accessible |
| करि | करके; रूप में | as; making it |
| पावा | प्राप्त किया | obtained |
| तजें | छोड़ने पर | if abandoned |
| तिहूँ | तीनों | all three |
| पुर | लोकों में | worlds |
| अपजसु | बदनामी | dishonor |
| छावा | छा जाएगी | would spread |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.95
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 422
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 422, 422
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।