अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सिबि दधीचि हरिचंद नरेसा। सहे धरम हित कोटि कलेसा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दशिबि, दधीचि और राजा हरिश्चन्द्रने धर्मके लिये करोड़ों (अनेकों) कष्ट सहे थे। बुद्धिमान् राजा रन्तिदेव और बलि बहुत-से संकट सहकर भी धर्मको पकड़े रहे (उन्होंने धर्मका परित्याग नहीं किया)॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 422 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सिबि दधीचि हरिचंद नरेसा। सहे धरम हित कोटि कलेसा।।
रंतिदेव बलि भूप सुजाना। धरमु धरेउ सहि संकट नाना।।
स्रोत अभिलेख 2.95 · पुस्तक पृ. 422, 422
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सिबि दधीचि हरिचंद नरेसा। सहे धरम हित कोटि कलेसा।।
English explanation
King Shibi, the sage Dadhichi, and King Harishchandra endured countless hardships for the sake of righteousness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सिबि | राजा शिबि | King Shibi |
| दधीचि | ऋषि दधीचि | the sage Dadhichi |
| हरिचंद | राजा हरिश्चंद्र | Harishchandra |
| नरेसा | राजा | king |
| सहे | सहन किए | endured |
| धरम | धर्म के | of righteousness |
| हित | लिए | for the sake |
| कोटि | करोड़ों; असंख्य | millions; countless |
| कलेसा | कष्ट | hardships |
2 रंतिदेव बलि भूप सुजाना। धरमु धरेउ सहि संकट नाना।।
English explanation
The wise kings Rantideva and Bali upheld righteousness while enduring many adversities.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रंतिदेव | राजा रंतिदेव | King Rantideva |
| बलि | राजा बलि | King Bali |
| भूप | राजा | kings |
| सुजाना | विवेकशील | wise |
| धरमु | धर्म | righteousness |
| धरेउ | निभाया; धारण किया | upheld |
| सहि | सहकर | enduring |
| संकट | कठिनाइयाँ | adversities |
| नाना | अनेक प्रकार की | of many kinds |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.95
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 422
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 422, 422
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।