अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
संपति सब रघुपति कै आही। जौ बिनु जतन चलौं तजि ताही।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसारी सम्पत्ति श्रीरघुनाथजीकी है। यदि उसकी [रक्षाकी] व्यवस्था किये बिना उसे ऐसे ही छोड़कर चल दूँ, तो परिणाममें मेरी भलाई नहीं है। क्योंकि स्वामीका द्रोह सब पापोंमें शिरोमणि (श्रेष्ठ) है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 497 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
संपति सब रघुपति कै आही। जौ बिनु जतन चलौं तजि ताही।।
तौ परिनाम न मोरि भलाई। पाप सिरोमनि साइँ दोहाई।।
स्रोत अभिलेख 2.186 · पुस्तक पृ. 497, 498
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 संपति सब रघुपति कै आही। जौ बिनु जतन चलौं तजि ताही।।
English explanation
All this property belongs to Rama, lord of the Raghu lineage. If I leave it and depart without arranging for its care—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संपति | संपत्ति | property |
| सब | सारी | all |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of the Raghu lineage |
| कै | की | belonging to |
| आही | है | is |
| जौ | यदि | if |
| बिनु | बिना | without |
| जतन | देखभाल के प्रबंध | arrangements for care |
| चलौं | मैं चल दूँ | I depart |
| तजि | छोड़कर | leaving behind |
| ताही | उस संपत्ति को | that property |
2 तौ परिनाम न मोरि भलाई। पाप सिरोमनि साइँ दोहाई।।
English explanation
Then the outcome will not be good for me. I invoke my lord as witness: I would be the foremost of sinners.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तौ | तो | then |
| परिनाम | अंततः; परिणाम में | in the outcome |
| न | नहीं | not |
| मोरि | मेरी | my |
| भलाई | भलाई | well-being |
| पाप | पाप; यहाँ पापियों का भाव | sin; here implying sinners |
| सिरोमनि | सबसे बड़ा; शिरोमणि | foremost; crowning figure |
| साइँ | स्वामी की | of my lord |
| दोहाई | दुहाई; साक्षी मानकर पुकार | solemn appeal as witness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.186
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 497
- सहायक विषय
- अयोध्यावासियोंसहित श्रीभरत-शत्रुघ्न आदिका वनगमन
- मुद्रित पृष्ठ
- 497, 498
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।