अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करइ स्वामि हित सेवकु सोई। दूषन कोटि देइ किन कोई।।
मूल पाठ
करइ स्वामि हित सेवकु सोई। दूषन कोटि देइ किन कोई।।
अस बिचारि सुचि सेवक बोले। जे सपनेहुँ निज धरम न डोले।।
स्रोत अभिलेख 2.186 · पुस्तक पृ. 497, 498
भावार्थ
मूल पाठ के बादसेवक वही है जो स्वामीका हित करे, चाहे कोई करोड़ों दोष क्यों न दे। भरतजीने ऐसा विचारकर ऐसे विश्वासपात्र सेवकोंको बुलाया जो कभी स्वप्रमें भी अपने धर्मसे नहीं डिगे थे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 497 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 करइ स्वामि हित सेवकु सोई। दूषन कोटि देइ किन कोई।।
English explanation
The true servant is one who acts for the master’s good, even if anyone heaps countless accusations upon him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करइ | करता है | does |
| स्वामि | स्वामी का | the master’s |
| हित | हित | good; welfare |
| सेवकु | सेवक | servant |
| सोई | वही | that very one |
| दूषन | दोष; आरोप | faults; accusations |
| कोटि | करोड़ों | millions |
| देइ | दे | may lay upon him |
| किन | क्यों न; चाहे | even if |
| कोई | कोई भी | anyone |
2 अस बिचारि सुचि सेवक बोले। जे सपनेहुँ निज धरम न डोले।।
English explanation
Reflecting thus, Bharata summoned upright servants who did not waver from their duty even in dreams.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| बिचारि | विचार करके | having reflected |
| सुचि | शुद्ध आचरण वाले | upright; of pure conduct |
| सेवक | सेवकों को | the servants |
| बोले | बुलाया | summoned |
| जे | जो | who |
| सपनेहुँ | सपने में भी | even in dreams |
| निज | अपने | their own |
| धरम | कर्तव्य से | from duty |
| न | नहीं | not |
| डोले | डिगते थे | wavered |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.186
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 497
- सहायक विषय
- अयोध्यावासियोंसहित श्रीभरत-शत्रुघ्न आदिका वनगमन
- मुद्रित पृष्ठ
- 497, 498
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