अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहि सबु मरमु धरमु भल भाषा। जो जेहि लायक सो तेहिं राखा।।
मूल पाठ
कहि सबु मरमु धरमु भल भाषा। जो जेहि लायक सो तेहिं राखा।।
करि सबु जतनु राखि रखवारे। राम मातु पहिं भरतु सिधारे।।
स्रोत अभिलेख 2.186 · पुस्तक पृ. 497, 498
भावार्थ
मूल पाठ के बादभरतजीने उनको सब भेद समझाकर फिर उत्तम धर्म बतलाया; और जो जिस योग्य था, उसे उसी कामपर नियुक्त कर दिया। सब व्यवस्था करके, रक्षकोंको रखकर भरतजी राममाता कौसल्याजीके पास गये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 497 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कहि सबु मरमु धरमु भल भाषा। जो जेहि लायक सो तेहिं राखा।।
English explanation
After explaining the whole matter, Bharata clearly set out their duties and assigned each person to the work for which he was suited.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहि | कहकर | having explained |
| सबु | सारा | all |
| मरमु | मर्म; भीतरी बात | the essential, underlying matter |
| धरमु | कर्तव्य | duty |
| भल | भली प्रकार | clearly; well |
| भाषा | समझाया; कहा | explained; stated |
| जो | जो व्यक्ति | whoever |
| जेहि | जिस काम के | for whichever task |
| लायक | योग्य | suited |
| सो | उस व्यक्ति को | that person |
| तेहिं | उसी काम में | in that very task |
| राखा | नियुक्त किया | assigned |
2 करि सबु जतनु राखि रखवारे। राम मातु पहिं भरतु सिधारे।।
English explanation
Having made all arrangements and appointed guards, Bharata went to Rama’s mother.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having made |
| सबु | सभी | all |
| जतनु | प्रबंध | arrangements |
| राखि | नियुक्त करके | having appointed |
| रखवारे | रखवाले | guards; caretakers |
| राम | राम की | Rama’s |
| मातु | माता कौसल्या | mother, Kausalya |
| पहिं | के पास | to; near |
| भरतु | राम के भाई भरत | Bharata, Rama’s brother |
| सिधारे | गए | went |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.186
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 497
- सहायक विषय
- अयोध्यावासियोंसहित श्रीभरत-शत्रुघ्न आदिका वनगमन
- मुद्रित पृष्ठ
- 497, 498
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।