अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
घर घर साजहिं बाहन नाना। हरषु हृदयँ परभात पयाना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दघर-घर लोग अनेकों प्रकारकी सवारियाँ सजा रहे हैं। हृदयमें [बड़ा] हर्ष है कि सबेरे चलना है। भरतजीने घर जाकर विचार किया कि नगर, घोड़े, हाथी, महल-खजाना आदि—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 497 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
घर घर साजहिं बाहन नाना। हरषु हृदयँ परभात पयाना।।
भरत जाइ घर कीन्ह बिचारू। नगरु बाजि गज भवन भँडारू।।
स्रोत अभिलेख 2.186 · पुस्तक पृ. 497, 498
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 घर घर साजहिं बाहन नाना। हरषु हृदयँ परभात पयाना।।
English explanation
In every household, people prepare various vehicles, joyful at heart that departure will be in the morning.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| घर | घर | household |
| घर | घर; मिलाकर: प्रत्येक घर में | household; together: in every household |
| साजहिं | तैयार करते हैं | prepare |
| बाहन | वाहन | vehicles |
| नाना | अनेक प्रकार के | of various kinds |
| हरषु | हर्ष | joy |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| परभात | प्रातःकाल | in the morning |
| पयाना | प्रस्थान | departure |
2 भरत जाइ घर कीन्ह बिचारू। नगरु बाजि गज भवन भँडारू।।
English explanation
Bharata went home and reflected: the city, horses, elephants, buildings, and stores—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | राम के भाई भरत | Bharata, Rama’s brother |
| जाइ | जाकर | having gone |
| घर | घर | home |
| कीन्ह | किया | made |
| बिचारू | विचार | a reflection |
| नगरु | नगर | the city |
| बाजि | घोड़े | horses |
| गज | हाथी | elephants |
| भवन | भवन | buildings |
| भँडारू | भंडार | stores and treasury |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.186
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 497
- सहायक विषय
- अयोध्यावासियोंसहित श्रीभरत-शत्रुघ्न आदिका वनगमन
- मुद्रित पृष्ठ
- 497, 498
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