अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
संगमु सिंहासनु सुठि सोहा। छत्रु अखयबटु मुनि मनु मोहा।।
मूल पाठ
संगमु सिंहासनु सुठि सोहा। छत्रु अखयबटु मुनि मनु मोहा।।
चवँर जमुन अरु गंग तरंगा। देखि होहिं दुख दारिद भंगा।।
स्रोत अभिलेख 2.105 · पुस्तक पृ. 430, 431
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[गङ्गा, यमुना और सरस्वतीका] सङ्गम ही उसका अत्यन्त सुशोभित सिं हासन है। अक्षयवट छत्र है, जो मुनियोंके भी मनको मोहित कर लेता है। यमुनाजी और गङ्गाजीकी तरंगें उसके [श्याम और श्वेत] चँवर हैं, जिनको देखकर ही दु:ख और दरिद्रता नष्ट हो जाती है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 431 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 संगमु सिंहासनु सुठि सोहा। छत्रु अखयबटु मुनि मनु मोहा।।
English explanation
The confluence shines beautifully as his throne; the Akshayavat is his royal canopy, captivating the minds of sages.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संगमु | नदियों का संगम | the confluence of rivers |
| सिंहासनु | सिंहासन | throne |
| सुठि | बहुत; भली भाँति | very; beautifully |
| सोहा | शोभित हुआ | shone splendidly |
| छत्रु | राजछत्र | royal canopy |
| अखयबटु | अक्षयवट, प्रयाग का पवित्र बरगद | Akshayavat, Prayag’s sacred banyan |
| मुनि | मुनियों का | of sages |
| मनु | मन | mind |
| मोहा | मोह लिया | captivated |
2 चवँर जमुन अरु गंग तरंगा। देखि होहिं दुख दारिद भंगा।।
English explanation
The waves of the Yamuna and Ganga are his royal fly-whisks; beholding them dispels sorrow and poverty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चवँर | चँवर | royal fly-whisks |
| जमुन | यमुना नदी की | of the Yamuna River |
| अरु | और | and |
| गंग | गंगा नदी की | of the Ganga River |
| तरंगा | तरंगें | waves |
| देखि | देखकर | on beholding |
| होहिं | हो जाते हैं | become |
| दुख | दुख | sorrow |
| दारिद | दरिद्रता | poverty |
| भंगा | नष्ट | dispelled |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.105
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 431
- सहायक विषय
- प्रयाग पहुँचना, श्रीराम-भरद्वाज-संवाद, यमुनातीरनिवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 430, 431
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।