अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
श्रवन समीप भए सित केसा। मनहुँ जरठपनु अस उपदेसा।।
मूल पाठ
श्रवन समीप भए सित केसा। मनहुँ जरठपनु अस उपदेसा।।
नृप जुबराज राम कहुँ देहू। जीवन जनम लाहु किन लेहू।।
स्रोत अभिलेख 2.2 · पुस्तक पृ. 345, 345
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[देखा कि] कानोंके पास बाल सफेद हो गये हैं, मानो बुढ़ापा ऐसा उपदेश कर रहा है कि हे राजन्! श्रीरामचन्द्रजीको युवराज-पद देकर अपने जीवन और जन्मका लाभ क्यों नहीं लेते॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 345 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 श्रवन समीप भए सित केसा। मनहुँ जरठपनु अस उपदेसा।।
English explanation
The hair near his ears had turned white, as though old age were offering this counsel.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रवन | कान | ears |
| समीप | के पास | near |
| भए | हो गए थे | had become |
| सित | सफेद | white |
| केसा | बाल | hair |
| मनहुँ | मानो | as though |
| जरठपनु | बुढ़ापा | old age |
| अस | ऐसा; इस प्रकार | thus; in this manner |
| उपदेसा | उपदेश दे रहा हो | were giving counsel |
2 नृप जुबराज राम कहुँ देहू। जीवन जनम लाहु किन लेहू।।
English explanation
O king, give Rama the position of crown prince; why not gain the fulfillment of your life and birth?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नृप | हे राजा | O king |
| जुबराज | युवराज का पद | the position of crown prince |
| राम | राम | Rama |
| कहुँ | को | to |
| देहू | दीजिए | give; bestow |
| जीवन | जीवन का | of life |
| जनम | जन्म का | of birth |
| लाहु | लाभ; सार्थक फल | benefit; fulfillment |
| किन | क्यों नहीं | why not |
| लेहू | लीजिए; प्राप्त कीजिए | take; obtain |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 345
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 345, 345
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।