अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मंगलमूल रामु सुत जासू। जो कछु कहिज थोर सबु तासू।।
मूल पाठ
मंगलमूल रामु सुत जासू। जो कछु कहिज थोर सबु तासू।।
रायँ सुभायँ मुकुरु कर लीन्हा। बदनु बिलोकि मुकुट सम कीन्हा।।
स्रोत अभिलेख 2.2 · पुस्तक पृ. 345, 345
भावार्थ
मूल पाठ के बादमङ्गलोंके मूल श्रीरामचन्द्रजी जिनके पुत्र हैं, उनके लिये जो कुछ कहा जाय सब थोड़ा है। राजाने स्वाभाविक ही हाथमें दर्पण ले लिया और उसमें अपना मुँह देखकर मुकुटको सीधा किया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 345 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मंगलमूल रामु सुत जासू। जो कछु कहिज थोर सबु तासू।।
English explanation
For one whose son is Rama, the source of auspiciousness, whatever is said in his praise falls short.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंगलमूल | मंगल के मूल; कल्याण के स्रोत | source of auspiciousness |
| रामु | राम | Rama, Dasharatha’s son |
| सुत | पुत्र | son |
| जासू | जिनके | whose |
| जो | जो भी | whatever |
| कछु | कुछ | anything |
| कहिज | कहा जाए | may be said |
| थोर | थोड़ा; अपर्याप्त | little; insufficient |
| सबु | सब | all of it |
| तासू | उनके विषय में | about him |
2 रायँ सुभायँ मुकुरु कर लीन्हा। बदनु बिलोकि मुकुट सम कीन्हा।।
English explanation
The king casually took a mirror in his hand and, looking at his face, straightened his crown.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रायँ | राजा ने | the king |
| सुभायँ | सहज भाव से | naturally; casually |
| मुकुरु | दर्पण | mirror |
| कर | हाथ में | in his hand |
| लीन्हा | लिया | took |
| बदनु | अपना मुख | his face |
| बिलोकि | देखकर | having looked at |
| मुकुट | मुकुट | crown |
| सम | सीधा; ठीक | straight; properly aligned |
| कीन्हा | किया | made; adjusted |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 345
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 345, 345
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।