अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नृप सब रहहिं कृपा अभिलाषें। लोकप करहिं प्रीति रुख राखें।।
मूल पाठ
नृप सब रहहिं कृपा अभिलाषें। लोकप करहिं प्रीति रुख राखें।।
तिभुवन तीनि काल जग माहीं। भूरि भाग दसरथ सम नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.2 · पुस्तक पृ. 345, 345
भावार्थ
मूल पाठ के बादसब राजा उनकी कृपा चाहते हैं और लोकपालगण उनके रुखको रखते हुए (अनुकूल होकर) प्रीति करते हैं। [पृथ्वी, आकाश, पाताल] तीनों भुवनोंमें और [भूत, भविष्य, वर्तमान] तीनों कालोंमें दशरथजीके समान बड़भागी [और] कोई नहीं है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 345 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नृप सब रहहिं कृपा अभिलाषें। लोकप करहिं प्रीति रुख राखें।।
English explanation
All kings sought his favor; even the guardians of the worlds showed affection while respecting his wishes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नृप | राजा | kings |
| सब | सभी | all |
| रहहिं | रहते थे | remained |
| कृपा | उनकी कृपा | his favor |
| अभिलाषें | अभिलाषा किए हुए | desiring; seeking |
| लोकप | लोकों के रक्षक देवता | divine guardians of the worlds |
| करहिं | करते थे | showed; practiced |
| प्रीति | प्रेम | affection |
| रुख | उनकी इच्छा; रुख | his wishes; inclination |
| राखें | ध्यान में रखकर | respecting; keeping in mind |
2 तिभुवन तीनि काल जग माहीं। भूरि भाग दसरथ सम नाहीं।।
English explanation
In all three worlds and across past, present, and future, none is as greatly fortunate as Dasharatha.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तिभुवन | तीनों लोक | the three worlds |
| तीनि | तीन | three |
| काल | काल—भूत, वर्तमान और भविष्य | times—past, present, and future |
| जग | संसार | the universe |
| माहीं | में | in |
| भूरि | अत्यधिक | abundant; great |
| भाग | भाग्य | good fortune |
| दसरथ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| सम | के समान | equal to; like |
| नाहीं | कोई नहीं है | there is none |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 345
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 345, 345
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।