अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लोग बिकल मुरुछित नरनाहू। काह करिअ कछु सूझ न काहू।।
मूल पाठ
लोग बिकल मुरुछित नरनाहू। काह करिअ कछु सूझ न काहू।।
रामु तुरत मुनि बेषु बनाई। चले जनक जननिहि सिरु नाई।।
स्रोत अभिलेख 2.79 · पुस्तक पृ. 408, 409
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजा मूॢच्छत हो गये, लोग व्याकुल हैं। किसीको कुछ सूझ नहीं पड़ता कि क्या करें। श्रीरामचन्द्रजी तुरंत मुनिका वेष बनाकर और माता-पिताको सिर नवाकर चल दिये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 409 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 लोग बिकल मुरुछित नरनाहू। काह करिअ कछु सूझ न काहू।।
English explanation
The people are distraught, and the king is unconscious. No one can think what should be done.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लोग | लोग | the people |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| मुरुछित | मूर्छित; बेहोश | unconscious |
| नरनाहू | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| काह | क्या | what |
| करिअ | किया जाए | should be done |
| कछु | कुछ | anything |
| सूझ | सूझता; समझ में आता | comes to mind |
| न | नहीं | not |
| काहू | किसी को | to anyone |
2 रामु तुरत मुनि बेषु बनाई। चले जनक जननिहि सिरु नाई।।
English explanation
Rama immediately put on an ascetic’s attire and departed after bowing his head to his father and mother.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामु | राम | Rama |
| तुरत | तुरंत | immediately |
| मुनि | मुनि का | an ascetic’s |
| बेषु | वेश; पहनावा | attire |
| बनाई | बनाकर; धारण करके | having put on |
| चले | चल दिए | departed |
| जनक | पिता | father |
| जननिहि | माता को | to his mother |
| सिरु | सिर | head |
| नाई | झुकाकर | having bowed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.79
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 409
- सहायक विषय
- श्रीरामजी, लक्ष्मणजी, सीताजीका महाराज दशरथके पास विदा माँगने जाना, दशरथजीका सीताजीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 408, 409
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।