अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस बिचारि सोइ करहु जो भावा। राम जननि सिख सुनि सुखु पावा।।
मूल पाठ
अस बिचारि सोइ करहु जो भावा। राम जननि सिख सुनि सुखु पावा।।
भूपहि बचन बानसम लागे। करहिं न प्रान पयान अभागे।।
स्रोत अभिलेख 2.79 · पुस्तक पृ. 408, 409
भावार्थ
मूल पाठ के बादऐसा विचारकर जो तुम्हें अच्छा लगे वही करो। माताकी सीख सुनकर श्रीरामचन्द्रजीने [बड़ा] सुख पाया। परन्तु राजाको ये वचन बाणके समान लगे। [वे सोचने लगे] अब भी अभागे प्राण [क्यों] नहीं निकलते!॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 409 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अस बिचारि सोइ करहु जो भावा। राम जननि सिख सुनि सुखु पावा।।
English explanation
Considering this, do whatever pleases you. Hearing his mother’s counsel, Rama felt glad.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा; इस प्रकार | thus; this way |
| बिचारि | विचार करके | having considered |
| सोइ | वही | that very thing |
| करहु | करो | do |
| जो | जो | whatever; which |
| भावा | अच्छा लगे | pleases you |
| राम | राम ने | Rama |
| जननि | माता की | his mother’s |
| सिख | सीख; सलाह | counsel; advice |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सुखु | सुख; प्रसन्नता | gladness |
| पावा | पाया | experienced; obtained |
2 भूपहि बचन बानसम लागे। करहिं न प्रान पयान अभागे।।
English explanation
These words struck the king like arrows, yet his ill-fated life-breath would not depart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूपहि | राजा दशरथ को | to King Dasharatha |
| बचन | वचन; कही हुई बातें | words spoken |
| बानसम | बाणों के समान | like arrows |
| लागे | लगे; आघात कर गए | struck |
| करहिं | करते हैं | make; undertake |
| न | नहीं | not |
| प्रान | प्राण | life-breath |
| पयान | प्रस्थान; शरीर से निकलना | departure from the body |
| अभागे | अभागे | ill-fated |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.79
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 409
- सहायक विषय
- श्रीरामजी, लक्ष्मणजी, सीताजीका महाराज दशरथके पास विदा माँगने जाना, दशरथजीका सीताजीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 408, 409
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।