अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लोक बेद संमत सबु कहई। जेहि पितु देइ राजु सो लहई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयह लोक और वेद दोनोंको मान्य है और सब यही कहते हैं कि पिता जिसको राज्य दे वही पाता है। राजा सत्यव्रती थे; तुमको बुलाकर राज्य देते, तो सुख मिलता, धर्म रहता और बड़ाई होती॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 515 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
लोक बेद संमत सबु कहई। जेहि पितु देइ राजु सो लहई।।
राउ सत्यब्रत तुम्हहि बोलाई। देत राजु सुखु धरमु बड़ाई।।
स्रोत अभिलेख 2.207 · पुस्तक पृ. 515, 515
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 लोक बेद संमत सबु कहई। जेहि पितु देइ राजु सो लहई।।
English explanation
Everyone states this principle, sanctioned by worldly custom and the Vedas: whoever is given the kingdom by his father receives it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लोक | लोकाचार | worldly custom |
| बेद | वेद | the Vedas |
| संमत | मान्य | sanctioned by |
| सबु | सब लोग | everyone |
| कहई | कहते हैं | says |
| जेहि | जिसे | to whom |
| पितु | पिता | the father |
| देइ | देता है | gives |
| राजु | राज्य | the kingdom |
| सो | वही | that person |
| लहई | पाता है | receives |
2 राउ सत्यब्रत तुम्हहि बोलाई। देत राजु सुखु धरमु बड़ाई।।
English explanation
King Dasharatha, steadfast in truth, was summoning you to bestow the kingdom, happiness, righteousness, and honor upon you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राउ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| सत्यब्रत | सत्य का व्रत निभाने वाले | steadfast in his vow of truth |
| तुम्हहि | तुम्हें ही | to you |
| बोलाई | बुलाकर | having summoned |
| देत | देते हुए; दे रहे थे | giving; were bestowing |
| राजु | राज्य | the kingdom |
| सुखु | सुख | happiness |
| धरमु | धर्म | righteousness |
| बड़ाई | सम्मान; बड़ाई | honor |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.207
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 515
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 515, 515
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।