अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
यहउ कहत भल कहिहि न कोऊ। लोकु बेद बुध संमत दोऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयह कहते भी कोई भला न कहेगा, क्योंकि लोक और वेद दोनों ही विद्वानोंको मान्य है। किन्तु हे तात! तुम्हारा निर्मल यश गाकर तो लोक और वेद दोनों बड़ाई पावेंगे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 515 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
यहउ कहत भल कहिहि न कोऊ। लोकु बेद बुध संमत दोऊ।।
तात तुम्हार बिमल जसु गाई। पाइहि लोकउ बेदु बड़ाई।।
स्रोत अभिलेख 2.207 · पुस्तक पृ. 515, 515
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 यहउ कहत भल कहिहि न कोऊ। लोकु बेद बुध संमत दोऊ।।
English explanation
Even in saying this, no one will judge you unfavorably; both worldly custom and the Vedas are acknowledged by the wise.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यहउ | यह भी | even this |
| कहत | कहते हुए | while saying |
| भल | भला; अच्छा | good; favorably |
| कहिहि | कहेगा | will say |
| न | नहीं | not |
| कोऊ | कोई | anyone |
| लोकु | लोकाचार; समाज की रीति | worldly custom |
| बेद | वेद | the Vedas |
| बुध | विद्वानों द्वारा | by the wise |
| संमत | मान्य; स्वीकृत | acknowledged; approved |
| दोऊ | दोनों | both |
2 तात तुम्हार बिमल जसु गाई। पाइहि लोकउ बेदु बड़ाई।।
English explanation
Dear son, even the world and the Vedas will gain honor by singing your spotless glory.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | हे तात; प्रिय पुत्र | dear son |
| तुम्हार | तुम्हारा | your |
| बिमल | निर्मल; निष्कलंक | spotless |
| जसु | यश | glory; good reputation |
| गाई | गाकर | by singing |
| पाइहि | पाएँगे | will gain |
| लोकउ | लोक भी | even the world |
| बेदु | वेद | the Vedas |
| बड़ाई | बड़ाई; सम्मान | honor; praise |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.207
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 515
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 515, 515
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