अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम गवनु बन अनरथ मूला। जो सुनि सकल बिस्व भइ सूला।।
मूल पाठ
राम गवनु बन अनरथ मूला। जो सुनि सकल बिस्व भइ सूला।।
सो भावी बस रानि अयानी। करि कुचालि अंतहुँ पछितानी।।
स्रोत अभिलेख 2.207 · पुस्तक पृ. 515, 515
भावार्थ
मूल पाठ के बादसारे अनर्थकी जड़ तो श्रीरामचन्द्रजीका वनगमन है, जिसे सुनकर समस्त संसारको पीड़ा हुई। वह श्रीरामका वनगमन भी भावीवश हुआ। बेसमझ रानी तो भावीवश कुचाल करके अन्तमें पछतायी॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 515 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम गवनु बन अनरथ मूला। जो सुनि सकल बिस्व भइ सूला।।
English explanation
Rama’s departure for the forest became the root of calamity; hearing of it brought anguish to the whole world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम का | Rama’s |
| गवनु | जाना; प्रस्थान | departure |
| बन | वन को | to the forest |
| अनरथ | अनर्थ; विपत्ति | calamity |
| मूला | मूल; कारण | root; cause |
| जो | जिसे; जिस घटना को | which event |
| सुनि | सुनकर | upon hearing |
| सकल | समस्त | the whole |
| बिस्व | संसार को | world |
| भइ | हुई | arose; occurred |
| सूला | पीड़ा; संताप | anguish |
2 सो भावी बस रानि अयानी। करि कुचालि अंतहुँ पछितानी।।
English explanation
That happened under the sway of destiny; the unwise queen Kaikeyi regretted her scheming in the end.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह; वही घटना | that event |
| भावी | होनहार; नियति | destiny |
| बस | वश में | under the sway of |
| रानि | रानी कैकेयी | Queen Kaikeyi |
| अयानी | नासमझ | unwise |
| करि | करके | having carried out |
| कुचालि | बुरी चाल; अनुचित षड्यंत्र | a wrongful scheme |
| अंतहुँ | अंत में भी; आखिरकार | in the end |
| पछितानी | पछताईं | regretted it |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.207
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 515
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 515, 515
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