अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लागहिं कुमुख बचन सुभ कैसे। मगहँ गयादिक तीरथ जैसे।।
मूल पाठ
लागहिं कुमुख बचन सुभ कैसे। मगहँ गयादिक तीरथ जैसे।।
रामहि मातु बचन सब भाए। जिमि सुरसरि गत सलिल सुहाए।।
स्रोत अभिलेख 2.43 · पुस्तक पृ. 379, 380
भावार्थ
मूल पाठ के बादकैकेयीके बुरे मुखमें ये शुभ वचन कैसे लगते हैं जैसे मगध देशमें गया आदिक तीर्थ! श्रीरामचन्द्रजीको माता कैकेयीके सब वचन ऐसे अच्छे लगे जैसे गङ्गाजीमें जाकर [अच्छे-बुरे सभी प्रकारके] जल शुभ, सुन्दर हो जाते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 379 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 लागहिं कुमुख बचन सुभ कैसे। मगहँ गयादिक तीरथ जैसे।।
English explanation
How do good words sound from an evil mouth? Like sacred places such as Gaya in Magadha.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लागहिं | लगते हैं | seem; sound |
| कुमुख | बुरे मुख से | from an evil mouth |
| बचन | वचन | words |
| सुभ | शुभ; अच्छे | good; auspicious |
| कैसे | कैसे | how |
| मगहँ | मगध में | in Magadha |
| गयादिक | गया आदि | Gaya and others |
| तीरथ | तीर्थस्थल | sacred pilgrimage places |
| जैसे | जैसे | like |
2 रामहि मातु बचन सब भाए। जिमि सुरसरि गत सलिल सुहाए।।
English explanation
All his mother’s words pleased Rama, just as water becomes pleasing when it enters the Ganges.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रामहि | राम को | to Rama |
| मातु | माता के | his mother’s |
| बचन | वचन | words |
| सब | सब | all |
| भाए | अच्छे लगे | were pleasing |
| जिमि | जैसे | just as |
| सुरसरि | गंगा में | into the Ganges |
| गत | पहुँचा हुआ; मिला हुआ | entered; joined |
| सलिल | जल | water |
| सुहाए | सुहावना लगता है | becomes pleasing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.43
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 379
- सहायक विषय
- श्रीराम-कैकेयी-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 379, 380
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।