अयोध्याकाण्ड · दोहा 43 · दोहा/सोरठा
गइ मुरुछा रामहि सुमिरि नृप फिरि करवट लीन्ह।
गइ मुरुछा रामहि सुमिरि नृप फिरि करवट लीन्ह।
सचिव राम आगमन कहि बिनय समय सम कीन्ह।।43।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.43 · पुस्तक पृ. 379, 380
भावार्थ और शब्दार्थ
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1गइ मुरुछा रामहि सुमिरि नृप फिरि करवट लीन्ह।
मूर्च्छा दूर हुई; राम को याद करके राजा दशरथ ने फिर करवट ली।
English explanation
His swoon passed; remembering Rama, King Dasharatha turned onto his side again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गइ | दूर हुई | passed away |
| मुरुछा | मूर्च्छा; बेहोशी | swoon; unconsciousness |
| रामहि | राम को | Rama |
| सुमिरि | स्मरण करके | remembering |
| नृप | राजा दशरथ ने | King Dasharatha |
| फिरि | फिर | again |
| करवट | करवट | a turn onto his side |
| लीन्ह | ली | took |
2 सचिव राम आगमन कहि बिनय समय सम कीन्ह।।43।।
मंत्री सुमंत्र ने राम के आने की बात बताकर समय के अनुकूल विनम्र निवेदन किया।
English explanation
Minister Sumantra announced Rama’s arrival and made a humble appeal suited to the occasion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सचिव | मंत्री सुमंत्र ने | Minister Sumantra |
| राम | राम के | Rama’s |
| आगमन | आने की बात | arrival |
| कहि | बताकर | having announced |
| बिनय | विनम्र निवेदन | humble appeal |
| समय | समय; परिस्थिति के | the occasion |
| सम | अनुकूल | suited to |
| कीन्ह | किया | made |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 43
- स्रोत अभिलेख
- 2.43
- सहायक विषय
- श्रीराम-कैकेयी-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 379, 380
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