अयोध्याकाण्ड · दोहा 42 · दोहा/सोरठा
सहज सरल रघुबर बचन कुमति कुटिल करि जान।
सहज सरल रघुबर बचन कुमति कुटिल करि जान।
चलइ जोंक जल बक्रगति जद्यपि सलिलु समान।।42।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.42 · पुस्तक पृ. 378, 379
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सहज सरल रघुबर बचन कुमति कुटिल करि जान।
कुबुद्धि कैकेयी ने राम के स्वभावतः सीधे वचनों को कुटिल समझा।
English explanation
Ill-minded Kaikeyi took Rama’s naturally straightforward words to be devious.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहज | स्वभावतः | naturally |
| सरल | सीधे; निष्कपट | straightforward; sincere |
| रघुबर | रघुकुलश्रेष्ठ राम के | of Rama, foremost of Raghu’s lineage |
| बचन | वचन | words |
| कुमति | कुबुद्धि वाली कैकेयी | ill-minded Kaikeyi |
| कुटिल | कुटिल; छलपूर्ण | devious; crafty |
| करि | के रूप में | as |
| जान | समझा | regarded |
2 चलइ जोंक जल बक्रगति जद्यपि सलिलु समान।।42।।
जोंक पानी में टेढ़ी चाल चलती है, यद्यपि पानी सम है।
English explanation
A leech moves crookedly through water, although the water itself is even.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चलइ | चलती है | moves |
| जोंक | जोंक | a leech |
| जल | पानी में | in water |
| बक्रगति | टेढ़ी चाल से | with a crooked motion |
| जद्यपि | यद्यपि | although |
| सलिलु | जल | the water |
| समान | सम; एकसमान | even; uniform |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 42
- स्रोत अभिलेख
- 2.42
- सहायक विषय
- श्रीराम-कैकेयी-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 378, 379
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