अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लगे जनक मुनिजन पद बंदन। रिषिन्ह प्रनामु कीन्ह रघुनंदन।।
मूल पाठ
लगे जनक मुनिजन पद बंदन। रिषिन्ह प्रनामु कीन्ह रघुनंदन।।
भाइन्ह सहित रामु मिलि राजहि। चले लवाइ समेत समाजहि।।
स्रोत अभिलेख 2.275 · पुस्तक पृ. 572, 573
भावार्थ
मूल पाठ के बादजनकजी [वसिष्ठ आदि अयोध्यावासी] मुनियोंके चरणोंकी वन्दना करने लगे और श्रीरामचन्द्रजीने [शतानन्द आदि जनकपुरवासी] ऋषियोंको प्रणाम किया। फिर भाइयोंसमेत श्रीरामजी राजा जनकजीसे मिलकर उन्हें समाजसहित अपने आश्रमको लिवा चले॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 573 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 लगे जनक मुनिजन पद बंदन। रिषिन्ह प्रनामु कीन्ह रघुनंदन।।
English explanation
Janaka began bowing at the sages' feet, and Rama offered obeisance to the sages.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लगे | करने लगे | began |
| जनक | राजा जनक | King Janaka |
| मुनिजन | मुनियों के | of the sages |
| पद | चरण | feet |
| बंदन | वंदना; नमन | reverent bowing |
| रिषिन्ह | ऋषियों को | to the sages |
| प्रनामु | प्रणाम | obeisance |
| कीन्ह | किया | offered |
| रघुनंदन | रघुकुल को आनंद देने वाले श्रीराम | Rama, delight of the Raghu lineage |
2 भाइन्ह सहित रामु मिलि राजहि। चले लवाइ समेत समाजहि।।
English explanation
Rama, together with his brothers, met King Janaka and proceeded, bringing him and his company along.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भाइन्ह | भाइयों के | his brothers |
| सहित | साथ | together with |
| रामु | श्रीराम | Rama |
| मिलि | मिलकर | having met |
| राजहि | राजा जनक से | King Janaka |
| चले | चले | proceeded |
| लवाइ | साथ लिवाकर | bringing along |
| समेत | सहित | along with |
| समाजहि | उनके समाज को | his accompanying company |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.275
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 573
- सहायक विषय
- जनकजीका पहुँचना, कोल-किरातादिकी भेंट, सबका परस्पर मिलाप
- मुद्रित पृष्ठ
- 572, 573
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