अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आवत जनकु चले एहि भाँती। सहित समाज प्रेम मति माती।।
मूल पाठ
आवत जनकु चले एहि भाँती। सहित समाज प्रेम मति माती।।
आए निकट देखि अनुरागे। सादर मिलन परसपर लागे।।
स्रोत अभिलेख 2.275 · पुस्तक पृ. 572, 573
भावार्थ
मूल पाठ के बादजनकजी इस प्रकार चले आ रहे हैं। समाजसहित उनकी बुद्धि प्रेममें मतवाली हो रही है। निकट आये देखकर सब प्रेममें भर गये और आदरपूर्वक आपसमें मिलने लगे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 573 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 आवत जनकु चले एहि भाँती। सहित समाज प्रेम मति माती।।
English explanation
Thus Janaka came onward with his company, his mind absorbed in love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आवत | आते हुए | coming |
| जनकु | राजा जनक | King Janaka |
| चले | चले आ रहे थे | were proceeding |
| एहि | इस | this |
| भाँती | प्रकार | manner |
| सहित | साथ | together with |
| समाज | साथ आए लोगों का समूह | the accompanying company |
| प्रेम | प्रेम में | in love |
| मति | बुद्धि; मन | mind |
| माती | मग्न; मतवाली | absorbed; intoxicated |
2 आए निकट देखि अनुरागे। सादर मिलन परसपर लागे।।
English explanation
As they drew near, seeing one another filled them with affection, and they began greeting one another respectfully.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आए | आ गए | came |
| निकट | पास | near |
| देखि | देखकर | on seeing |
| अनुरागे | प्रेम से भर गए | became filled with affection |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| मिलन | मिलने | to greet |
| परसपर | एक-दूसरे से | one another |
| लागे | लगे | began |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.275
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 573
- सहायक विषय
- जनकजीका पहुँचना, कोल-किरातादिकी भेंट, सबका परस्पर मिलाप
- मुद्रित पृष्ठ
- 572, 573
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।