अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम दरस लालसा उछाहू। पथ श्रम लेसु कलेसु न काहू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामजीके दर्शनकी लालसा और उत्साहके कारण किसीको रास्तेकी थकावट और क्लेश जरा भी नहीं है। मन तो वहाँ है जहाँ श्रीराम और जानकीजी हैं। बिना मनके शरीरके सुख-दु:खकी सुध किसको हो?॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 573 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राम दरस लालसा उछाहू। पथ श्रम लेसु कलेसु न काहू।।
मन तहँ जहँ रघुबर बैदेही। बिनु मन तन दुख सुख सुधि केही।।
स्रोत अभिलेख 2.275 · पुस्तक पृ. 572, 573
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 राम दरस लालसा उछाहू। पथ श्रम लेसु कलेसु न काहू।।
English explanation
They were eager and enthusiastic to see Rama; no one felt even the slightest fatigue or distress from the journey.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम के | of Rama |
| दरस | दर्शन | seeing; an audience with |
| लालसा | तीव्र इच्छा | longing |
| उछाहू | उत्साह | enthusiasm |
| पथ | मार्ग की | of the journey |
| श्रम | थकान | fatigue |
| लेसु | लेशमात्र | the slightest trace |
| कलेसु | कष्ट | distress |
| न | नहीं | not |
| काहू | किसी को | to anyone |
2 मन तहँ जहँ रघुबर बैदेही। बिनु मन तन दुख सुख सुधि केही।।
English explanation
Their minds were where Rama and Sita were. When the mind is elsewhere, who remains aware of the body's pain or pleasure?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन | mind |
| तहँ | वहाँ | there |
| जहँ | जहाँ | where |
| रघुबर | रघुकुल में श्रेष्ठ श्रीराम | Rama, foremost of the Raghu lineage |
| बैदेही | विदेह की राजकुमारी सीता | Sita, princess of Videha |
| बिनु | बिना | without |
| मन | मन के | the mind |
| तन | शरीर के | of the body |
| दुख | दुख | pain |
| सुख | सुख | pleasure |
| सुधि | सुध; चेतना | awareness |
| केही | किसे | to whom |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.275
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 573
- सहायक विषय
- जनकजीका पहुँचना, कोल-किरातादिकी भेंट, सबका परस्पर मिलाप
- मुद्रित पृष्ठ
- 572, 573
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।