अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लखि सब बिधि गुर स्वामि सनेहू। मिटेउ छोभु नहिं मन संदेहू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दगुरु और स्वामीका सब प्रकारसे स्नेह देखकर मेरा क्षोभ मिट गया, मनमें कुछ भी सन्देह नहीं रहा। हे दयाकी खान! अब वही कीजिये जिससे दासके लिये प्रभुके चित्तमें क्षोभ (किसी प्रकारका विचार) न हो॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 567 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
लखि सब बिधि गुर स्वामि सनेहू। मिटेउ छोभु नहिं मन संदेहू।।
अब करुनाकर कीजिअ सोई। जन हित प्रभु चित छोभु न होई।।
स्रोत अभिलेख 2.268 · पुस्तक पृ. 567, 567
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 लखि सब बिधि गुर स्वामि सनेहू। मिटेउ छोभु नहिं मन संदेहू।।
English explanation
Seeing the affection of my teacher and lord in every way, my distress vanished and no doubt remained in my mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखि | देखकर | having seen |
| सब | सब | every |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| गुर | गुरु का | of the teacher |
| स्वामि | स्वामी का | of the lord |
| सनेहू | स्नेह | affection |
| मिटेउ | मिट गया | vanished |
| छोभु | क्षोभ; व्याकुलता | distress |
| नहिं | नहीं रहा | did not remain |
| मन | मन में | in the mind |
| संदेहू | संदेह | doubt |
2 अब करुनाकर कीजिअ सोई। जन हित प्रभु चित छोभु न होई।।
English explanation
Now, compassionate lord, do what benefits your servant without causing distress in your own heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| करुनाकर | हे करुणा के भंडार | O compassionate lord |
| कीजिअ | कीजिए | please do |
| सोई | वही | that very thing |
| जन | सेवक का | of your servant |
| हित | हित | welfare |
| प्रभु | स्वामी के | of the lord |
| चित | चित्त में | in the heart |
| छोभु | क्षोभ | distress |
| न | न | not |
| होई | हो | arise |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.268
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 567
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरतादिका संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 567, 567
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।