अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लखि लघु बंधु बुद्धि सकुचाई। करत बदन पर भरत बड़ाई।।
मूल पाठ
लखि लघु बंधु बुद्धि सकुचाई। करत बदन पर भरत बड़ाई।।
भरतु कहहीं सोइ किएँ भलाई। अस कहि राम रहे अरगाई।।
स्रोत अभिलेख 2.259 · पुस्तक पृ. 559, 560
भावार्थ
मूल पाठ के बादछोटा भाई जानकर भरतके मुँहपर उसकी बड़ाई करनेमें मेरी बुद्धि सकुचाती है। (फिर भी मैं तो यही कहूँगा कि) भरत जो कुछ कहें, वही करनेमें भलाई है। ऐसा कहकर श्रीरामचन्द्रजी चुप हो रहे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 560 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 लखि लघु बंधु बुद्धि सकुचाई। करत बदन पर भरत बड़ाई।।
English explanation
Seeing Bharata as my younger brother, I feel hesitant to praise him to his face.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखि | देखकर | seeing |
| लघु | छोटा | younger |
| बंधु | भाई | brother |
| बुद्धि | मेरी बुद्धि | my mind |
| सकुचाई | संकोच करती है | feels hesitant |
| करत | करते हुए | while making |
| बदन | मुख के | the face |
| पर | सामने | before |
| भरत | भरत की | of Bharata |
| बड़ाई | प्रशंसा | praise |
2 भरतु कहहीं सोइ किएँ भलाई। अस कहि राम रहे अरगाई।।
English explanation
It is best to do whatever Bharata says. Having said this, Rama fell silent.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरतु | भरत | Bharata |
| कहहीं | कहें | may say |
| सोइ | वही | that very thing |
| किएँ | करने में | in doing |
| भलाई | भलाई है | lies what is best |
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| राम | राम | Rama |
| रहे | रह गए | remained |
| अरगाई | चुप होकर | silent |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.259
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 560
- सहायक विषय
- श्रीवसिष्ठजीका भाषण
- मुद्रित पृष्ठ
- 559, 560
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।