अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जे गुर पद अंबुज अनुरागी। ते लोकहुँ बेदहुँ बड़भागी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजो लोग गुरुके चरणकमलोंके अनुरागी हैं, वे लोकमें (लौकिक दृष्टिसे) भी और वेदमें (पारमार्थिक दृष्टिसे) भी बड़भागी होते हैं! [फिर] जिसपर आप (गुरु) का ऐसा स्नेह है, उस भरतके भाग्यको कौन कह सकता है?॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 560 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जे गुर पद अंबुज अनुरागी। ते लोकहुँ बेदहुँ बड़भागी।।
राउर जा पर अस अनुरागू। को कहि सकइ भरत कर भागू।।
स्रोत अभिलेख 2.259 · पुस्तक पृ. 559, 560
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जे गुर पद अंबुज अनुरागी। ते लोकहुँ बेदहुँ बड़भागी।।
English explanation
Those devoted to the guru’s lotus feet are greatly fortunate in the estimation of both the world and the Vedas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो लोग | those who |
| गुर | गुरु के | the guru’s |
| पद | चरण | feet |
| अंबुज | कमल | lotuses |
| अनुरागी | से प्रेम करने वाले | devoted to |
| ते | वे लोग | they |
| लोकहुँ | लोक की दृष्टि में भी | in the world’s estimation too |
| बेदहुँ | वेदों की दृष्टि में भी | in the Vedas’ estimation too |
| बड़भागी | अत्यंत भाग्यवान | greatly fortunate |
2 राउर जा पर अस अनुरागू। को कहि सकइ भरत कर भागू।।
English explanation
Who can describe Bharata’s good fortune, when you bear such affection toward him?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राउर | आपका | your |
| जा | जिसके | whom |
| पर | प्रति | toward |
| अस | ऐसा | such |
| अनुरागू | प्रेम | affection |
| को | कौन | who |
| कहि | वर्णन कर | describe |
| सकइ | सकता है | can |
| भरत | भरत | Bharata |
| कर | का | of |
| भागू | सौभाग्य | good fortune |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.259
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 560
- सहायक विषय
- श्रीवसिष्ठजीका भाषण
- मुद्रित पृष्ठ
- 559, 560
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।