अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बोले गुर आयस अनुकूला। बचन मंजु मृदु मंगलमूला।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामचन्द्रजी गुरुकी आज्ञाके अनुकूल मनोहर, कोमल और कल्याणके मूल वचन बोले— हे नाथ! आपकी सौगन्ध और पिताजीके चरणोंकी दुहाई है (मैं सत्य कहता हूँ कि) विश्वभरमें भरतके समान भाई कोई हुआ ही नहीं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 559 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बोले गुर आयस अनुकूला। बचन मंजु मृदु मंगलमूला।।
नाथ सपथ पितु चरन दोहाई। भयउ न भुअन भरत सम भाई।।
स्रोत अभिलेख 2.259 · पुस्तक पृ. 559, 560
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बोले गुर आयस अनुकूला। बचन मंजु मृदु मंगलमूला।।
English explanation
Rama spoke words in accord with the guru’s command—gracious, gentle, and a source of auspiciousness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बोले | राम बोले | Rama spoke |
| गुर | गुरु की | the guru’s |
| आयस | आज्ञा | command |
| अनुकूला | के अनुरूप | in accordance with |
| बचन | वचन | words |
| मंजु | सुंदर | gracious |
| मृदु | कोमल | gentle |
| मंगलमूला | मंगल के स्रोत | a source of auspiciousness |
2 नाथ सपथ पितु चरन दोहाई। भयउ न भुअन भरत सम भाई।।
English explanation
Master, I swear by you and invoke my father’s feet: there has never been a brother like Bharata in the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे स्वामी, हे गुरु | O master, O guru |
| सपथ | आपकी शपथ | an oath by you |
| पितु | पिता के | my father’s |
| चरन | चरणों की | feet |
| दोहाई | दुहाई देकर | invoking as solemn witness |
| भयउ | हुआ है | has existed |
| न | नहीं | not |
| भुअन | संसार में | in the world |
| भरत | भरत के | Bharata |
| सम | समान | like |
| भाई | भाई | a brother |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.259
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 559
- सहायक विषय
- श्रीवसिष्ठजीका भाषण
- मुद्रित पृष्ठ
- 559, 560
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