अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लखन राम सियँ सुनि सुर बानी। अति सुखु लहेउ न जाइ बखानी।।
मूल पाठ
लखन राम सियँ सुनि सुर बानी। अति सुखु लहेउ न जाइ बखानी।।
इहाँ भरतु सब सहित सहाए। मंदाकिनीं पुनीत नहाए।।
स्रोत अभिलेख 2.233 · पुस्तक पृ. 537, 538
भावार्थ
मूल पाठ के बादलक्ष्मणजी, श्रीरामचन्द्रजी और सीताजीने देवताओंकी वाणी सुनकर अत्यन्त सुख पाया, जो वर्णन नहीं किया जा सकता। यहाँ भरतजीने सारे समाजके साथ पवित्र मन्दाकिनीमें स्नान किया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 537 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 लखन राम सियँ सुनि सुर बानी। अति सुखु लहेउ न जाइ बखानी।।
English explanation
Hearing the gods’ words, Lakshmana, Rama, and Sita experienced such joy that it cannot be described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखन | लक्ष्मण ने | Lakshmana |
| राम | राम ने | Rama |
| सियँ | सीता ने | Sita |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सुर | देवताओं की | of the gods |
| बानी | वाणी | words |
| अति | अत्यधिक | immense |
| सुखु | सुख | joy |
| लहेउ | पाया | experienced |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकता | can be |
| बखानी | वर्णन किया | described |
2 इहाँ भरतु सब सहित सहाए। मंदाकिनीं पुनीत नहाए।।
English explanation
Meanwhile, Bharata bathed in the sacred Mandakini with all his companions.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इहाँ | इधर; इस बीच | here; meanwhile |
| भरतु | भरत ने | Bharata |
| सब | सभी | all |
| सहित | सहित | together with |
| सहाए | साथी; सहायक | companions; attendants |
| मंदाकिनीं | मंदाकिनी नदी में | in the Mandakini River |
| पुनीत | पवित्र | sacred |
| नहाए | स्नान किया | bathed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.233
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 537
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 537, 538
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