अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सरित समीप राखि सब लोगा। मागि मातु गुर सचिव नियोगा।।
मूल पाठ
सरित समीप राखि सब लोगा। मागि मातु गुर सचिव नियोगा।।
चले भरतु जहँ सिय रघुराई। साथ निषादनाथु लघु भाई।।
स्रोत अभिलेख 2.233 · पुस्तक पृ. 537, 538
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर सबको नदीके समीप ठहराकर तथा माता, गुरु और मन्त्रीकी आज्ञा माँगकर निषादराज और शत्रुघ्रको साथ लेकर भरतजी वहाँको चले जहाँ श्रीसीताजी और श्रीरघुनाथजी थे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 537 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सरित समीप राखि सब लोगा। मागि मातु गुर सचिव नियोगा।।
English explanation
Leaving everyone near the river and seeking permission from the mothers, the preceptor, and the ministers—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सरित | नदी के | of the river |
| समीप | पास | near |
| राखि | ठहराकर | having left stationed |
| सब | सभी | all |
| लोगा | लोगों को | the people |
| मागि | माँगकर | having sought |
| मातु | माताओं से | from the mothers |
| गुर | गुरु से | from the preceptor |
| सचिव | मंत्रियों से | from the ministers |
| नियोगा | आज्ञा; अनुमति | permission; authorization |
2 चले भरतु जहँ सिय रघुराई। साथ निषादनाथु लघु भाई।।
English explanation
Bharata set out toward where Sita and Rama were, accompanied by the Nishada chief and his younger brother Shatrughna.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | चल पड़े | set out |
| भरतु | भरत | Bharata |
| जहँ | जहाँ | where |
| सिय | सीता | Sita |
| रघुराई | राम, रघुवंश के स्वामी | Rama, lord of Raghu’s line |
| साथ | साथ में | along with him |
| निषादनाथु | निषादराज गुह | Guha, chief of the Nishadas |
| लघु | छोटे | younger |
| भाई | भाई शत्रुघ्न | brother Shatrughna |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.233
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 537
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 537, 538
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।